
drms news (मानपुर-उमरिया)। कंधों पर पीढ़ियों का भविष्य ढोने वाले शिक्षक आज खुद अपने भविष्य को लेकर असमंजस में खड़े हैं। मध्यप्रदेश में TET को लेकर जारी आदेशों ने उन शिक्षकों के जख्म कुरेद दिए हैं, जिन्होंने 28–30 साल तक चुपचाप बच्चों को पढ़ाया, गांवों को रोशन किया, और अब उन्हीं से फिर “योग्यता साबित” करने को कहा जा रहा है।
इस पीड़ा को आवाज देते हुए अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा, जिला उमरिया के अध्यक्ष पवन चतुर्वेदी के निर्देशन में, तथा ब्लॉक अध्यक्ष अशोक गौतम के नेतृत्व में, सैकड़ो की संख्या में शिक्षकों ने कल 11 अप्रैल 2026 को अनुविभागीय दंडाधिकारी मानपुर को प्रदेश के मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। यह सिर्फ एक ज्ञापन नहीं, बल्कि उन हजारों शिक्षकों की घुटन है, जो वर्षों की सेवा के बाद भी असुरक्षा के साये में जी रहे हैं।
शिक्षकों का सीधा सवाल है, जब हमने पूरी उम्र बच्चों को योग्य बनाया, तो आज हमें ही अयोग्य क्यों ठहराया जा रहा है ...?” 02 मार्च और 26 मार्च 2026 के आदेश अब शिक्षक समाज के लिए चिंता का कारण बन गए हैं। मोर्चा ने मांग की है कि इन आदेशों को तुरंत निरस्त किया जाए और सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल कर शिक्षकों को राहत दी जाए।
सिर्फ इतना ही नहीं, शिक्षकों ने अपनी वर्षों की सेवा के सम्मान की भी गुहार लगाई है। नई संवर्ग व्यवस्था में पहली नियुक्ति से सेवा गणना की जाए, ताकि पेंशन, ग्रेच्युटी और प्रमोशन जैसे अधिकार सुरक्षित रह सकें। गांवों के स्कूलों में आज भी वही शिक्षक बच्चों को उम्मीद सिखा रहे हैं, लेकिन उनके अपने दिल में अब निराशा घर कर रही है। यह मुद्दा अब सिर्फ एक प्रशासनिक आदेश नहीं रहा। यह सम्मान, सुरक्षा और संवेदना की लड़ाई बन चुका है। सरकार के सामने सवाल खड़ा है। क्या वो इन शिक्षकों की वर्षों की तपस्या को समझेगी, या फिर यह दर्द सड़कों पर उतरकर एक बड़े आंदोलन का रूप लेगा .... ?
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