अधिवक्ता भारतीय न्यायिक प्रणाली की रीढ़ की हड्डी : एडीजीपी डी.सी. सागर
संपादक वीरेन्द्र प्रताप सिंह DRMS NEWS 896263793 सोमवार 29 जनवरी 2024
DRMS NEWS शहडोल। अधिवक्ता संघ बुढ़ार द्वारा 25 वर्ष से अधिक अवधि से विधि व्यवसाय में कार्यरत वरिष्ठ अधिवक्ताओं का सम्मान समारोह एडीजीपी शहडोल संभाग डी.सी. सागर के मुख्य आतिथ्य में 28 जनवरी 2024 को आयोजित।
समारोह को संबोधित करते हुए एडीजीपी डी.सी. सागर ने कहा कि अधिवक्ता भारतीय न्यायिक प्रणाली की रीढ़ की हड्डी है। यह रीढ़ की हड्डी स्वस्थ और सशक्त रहनी चाहिए, तभी पीड़ित एवं आहत व्यक्तियों को न्याय मिल सकेगा।
सम्मान समारोह में अपने उद्बोधन में एडीजी श्री सागर ने अधिवक्ता गणों और उनके परिवार के सदस्यों के उत्साहवर्धन के लिए देश के पावन ग्रंथ रामचरित मानस के लंका काण्ड की चौपाई - सौरज धीरज तेहि रथ चाका। सत्य सील दृढ़ ध्वजा पताका॥, बल बिबेक दम परहित घोरे। छमा कृपा समता रजु जोरे।।
सुनाई और इसका भावार्थ बताया कि शौर्य और धैर्य उस रथ के पहिए हैं।
सत्य और शील (सदाचार) उसकी मजबूत ध्वजा और पताका हैं। बल, विवेक, दम (इंद्रियों का वश में होना) और परोपकार- ये चार उसके घोड़े हैं, जो क्षमा, दया और समता रूपी डोरी से रथ में जोड़े हुए हैं अपने व्यक्तित्व में यदि ये 12 गुण होंगे तो कोई वजह नहीं कि आपके जीवन रूपी रथ किसी भी युद्ध में परास्त हो सके।
इसी बीच कार्यक्रम में अधिवक्ताओं ने मांग करते हुए आग्रह किया कि उनके उत्साहवर्धन हेतु परम श्रद्धेय पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्री अटल बिहारी बाजपेई की कविताओं के कुछ पद्यांश सुनाएं।
जिस पर एडीजी डी.सी. सागर ने श्री बाजपेई जी की प्रसिद्ध कविता गीत नया गाता हूँ और कदम मिलाकर चलना होगा की कविता के कुछ पंक्तियां (1) टूटे हुए सपनों की कौन सुने, सिसकी अंतर को चीर व्यथा, पलकों पर ठिठकी हार नहीं मानूँगा, रार नहीं ठानूँगा,
काल के कपाल पे लिखता मिटाता हूँ, गीत नया गाता हूँ। (2) बाधाएँ आती हैं आएँ, घिरें प्रलय की घोर घटाएँ, पावों के नीचे अंगारे, सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ, निज हाथों में हँसते-हँसते, आग लगाकर जलना होगा, कदम मिलाकर चलना होगा। (3) तू खुद की खोज में निकल, तू किस लिए हताश है, तू चल तेरे वजूद की, समय को भी तलाश है, समय को भी तलाश है। (4) जो तुझ से लिपटी बेड़ियाँ, समझ न इनको वस्त्र तू , ये बेड़ियां पिघाल के, बना ले इनको शस्त्र तू, बना ले इनको शस्त्र तू, तू खुद की खोज में निकल। कविता सुनाकर अधिवक्ताओं को आत्मविभोर कर दिया।
इस अवसर पर मध्य प्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद के सह अध्यक्ष दिनेश नारायण पाठक, अभिभाषक संघ बुढ़ार के अध्यक्ष आलोक राय एवं सचिव मनोज गौतम तथा अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता जयकांत मिश्रा, संतशरण मिश्रा, हनुमान प्रसाद शर्मा, कामता प्रसाद गौतम, अन्य अधिवक्तागण, थाना प्रभारी बुढ़ार संजय जायसवाल एवं थाना स्टॉफ उपस्थित रहे।
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