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पूर्व सरपंच शारदा प्रसाद गौतम के अगुवाई में कर दरों के खिलाफ मोर्चा, ये कैसी विसंगति 22 और 235 रुपये वर्गफीट के अंतर पर नगर परिषद मानपुर से जवाब तलब ...?

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drms news (मानपुर-उमरिया)नगर परिषद मानपुर में संपत्ति कर की दरों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। वरिष्ठ कांग्रेसी एवं पूर्व सरपंच शारदा प्रसाद गौतम के अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर कर निर्धारण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए।ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि शहडोल संभाग अंतर्गत नगर परिषद बकहो का भी मानपुर के साथ विलय हुआ है। एक ही संभाग और समान प्रशासनिक ढांचे के अंतर्गत आने के बावजूद दोनों क्षेत्रों में संपत्ति कर की दरों में भारी अंतर को अन्यायपूर्ण बताया गया है तथा इसकी निष्पक्ष जांच एवं पुनर्समीक्षा की मांग की गई है।

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि नेशनल हाईवे पर स्थित विलयित क्षेत्र बकहो में संपत्ति कर की दर मात्र 22 रुपये प्रति वर्गफीट निर्धारित है, जबकि मानपुर नगर क्षेत्र में कथित रूप से 235 रुपये प्रति वर्गफीट तक कर लगाया जा रहा है। इस बड़े अंतर को लेकर नगरवासियों में असंतोष व्याप्त है और लोग कर निर्धारण के आधार पर सवाल उठा रहे हैं।ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि इसी उच्च दर के कारण नगरवासियों के मोबाइल फोन पर लाखों रुपये संपत्ति कर जमा करने के संदेश प्राप्त हो रहे हैं, जिससे मध्यमवर्गीय एवं निम्न आय वर्ग के परिवारों में चिंता और रोष का वातावरण है।

पूर्वसरपंच शारदा प्रसाद गौतम ने वर्ष 2020-21 के कोरोना काल का संपत्ति कर पूर्णतः माफ किए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि महामारी के दौरान नागरिक आर्थिक संकट, बेरोजगारी और व्यापारिक मंदी से जूझ रहे थे, ऐसे समय का कर वसूलना जनभावनाओं के विपरीत है।ज्ञापन सौंपते समय पूर्व सरपंच शारदा प्रसाद गौतम, ज्ञान प्रकाश पटेल, रवि सेन, भोला पटेल, विकास गौतम, विकास शुक्ला, विकास द्विवेदी, बिरजू मिश्रा, दिवाकर चतुर्वेदी सहित नगर परिषद क्षेत्र के अनेक नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कर दरों की पारदर्शी समीक्षा और न्यायसंगत निर्धारण की मांग दोहराई।

ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि शीघ्र ही कर दरों में संशोधन एवं कोरोना कालीन कर माफी संबंधी निर्णय नहीं लिया गया, तो व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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