
drms news (मानपुर-उमरिया)। अब राष्ट्रगान से पहले बजेगा वंदे मातरम, जिस आशय का आदेश केंद्र सरकार ने जारी किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वंदे मातरम को लेकर नई गाइड लाइंस जारी की हैं। अब सरकारी कार्यक्रमों और स्कूलों में 6 छंद वाला पूरा वंदे मातरम बजाना अनिवार्य होगा और इसके दौरान खड़े होकर राष्ट्रगीत का सम्मान करना जरूरी रहेगा, साथ ही यदि वंदे मातरम और जन गण मन दोनों बजते हैं तो पहले वंदे मातरम बजाया जाएगा।
इस महत्वपूर्ण निर्णय पर जिला भाजपा अध्यक्ष आशुतोष अग्रवाल ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार को धन्यवाद ज्ञापित किया है। आपने कहा कि वंदेमातरम केवल शब्द नही यह तो राष्ट्र भक्ति और जन चेतना जागृत करने का महामंत्र है। इस महामंत्र में वह शक्ति समाहित है, जो अपने नही अपनो के लिए जीने, राष्ट्र समाज के लिए जीने, स्वार्थ से ऊपर परमार्थ युक्त कार्यों को जीवन की प्राथमिकता बनाने का संदेश देते है।
आजादी की लड़ाई में वंदेमातरम का उद्घोष क्रांतिकारियों के नश नश में राष्ट्रभक्ति और साहस का ज्वार पैदा करता था। भारत माता की जय और वंदेमातरम बोलकर माँ भारती की संतानों ने एकत्व का बिगुल बजाकर फिरंगियों को ठिकाने लगाया था। बच्चे युवा प्रौढ़ सभी के हृदय में स्वतंत्रता की ज्वाला जल रही थी और मुख से वंदेमातरम का होता जोरदार उद्घोष अंग्रेजो की नींव हिला दिया था।
वंदेमातरम हमारा राष्ट्रीय गीत है प्रखर राष्ट्रभक्त वकिंमचंद्र ने इसकी रचना की थी। इस गीत के एक एक शब्द में भारत की महिमा समाहित है। शब्दों में राष्ट्र प्रेम की अगाध महक घुली हुई है। इसके सब्द राष्ट्रभक्ति का संचार करते है। इस गीत में 6 अंतरे है, जिसमें मातृभूमि का वंदन किया गया है। भारत भूमि का महिमा मंडन किया गया है माँ भारती की आराधना की गई है। यह गीत गाने से व्यक्ति की भावना में राष्ट्र आराधना समाहित हो जाती है। इसके एक एक शब्द में माँ भारती के मंगल की कामना निहित है।
आजादी के दीवानों ने इसी महामंत्र का उद्घोष करते हुए माँ भारती को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त करवाया था। क्रांतिवीरों ने वंदेमातरम बोलकर फाँसी के फंदे को गले लगाया था। आजादी के बाद काग्रेश सरकार ने तुष्टिकरण की राह पकड़ी और आजादी के महामंत्र को ही वह सम्मन नही दिया जिसका वह हकदार था। राष्ट्रगीत वंदेमातरम पर भी तुष्टिकरण की गई। पहले तो इसके अंतरे काटे गए। जबकि यह गीत जन जन के हृदय में बस चुका था।
मातृभूमि को प्रणाम करता यह गीत भारत माता की सुंदरता, समृद्धि और शक्ति का वर्णन करता है, जिसमें उसे जल, फल, सुगंधित हवा और हरी-भरी फसलों से युक्त, सुख और वरदान देने वाली बताया गया है, जिसकी रातें चाँदनी से सुशोभित हैं और जिसके हाथ में तलवार है, जो शक्ति और विजय का प्रतीक है, और यह बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा लिखा गया भारत का राष्ट्रीय गीत है और राष्ट्रगान की तरह इसे अनिवार्य किया जाना चाहिये था, लेकिन वोट की राजनीति करने वाली कांग्रेस ने राष्ट्रगीत पर भी अपनी कुदृष्टि डाली परिणामस्वरूप जो सम्मान इसे आजाद भारत मे मिल जाना चाहिये था वह अब 7 दशक बाद श्री मोदी के नेतृत्व में मिल रहा है।
केंद्र में राष्ट्रवादी सरकार है प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों से राष्ट्र हितैषी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। अपनी विरासत का संरक्षण संवर्धन किया जा रहा है। युवाओं को सच से अवगत करवाया जा रहा है। क्रांतिवीरों को सम्मानित किया जा रहा है। राष्ट्रीय गीत जो जन मानस की भावना में राष्ट्रवाद का अमृत भरता है ऐसी महत्वपूर्ण कालजयी रचना को सम्मानित किया जा रहा है।
वंदेमातरम गायन में 3 मिनट 10 सेकेंड का समय निर्धारित किया गया है। सरकारी कार्यक्रम, राष्ट्र ध्वज फहराते समय, राष्ट्रपति राज्यपाल के आगमन उनके संबोधन से पूर्व या बाद में राष्ट्रगीत गायन या वादन अनिवार्य किया गया है। जिला भाजपा अध्यक्ष आशुतोष अग्रवाल ने कहा कि केंद्र सरकार के इस ओजस्वी निर्णय से राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व अर्पित करने वाले माँ भारती के बीर सपूतों सहित राष्ट्र प्रथम की भावना से युक्त जन मानस अपने आपको गौरवांवित महसूस कर रहे है।
संपादक वीरेन्द्र प्रताप सिंह कृपया http://www.drmsnews.online वेबसाइट को शेयर, लाईक व लाइव जरूर करें और विज्ञापन व समाचारों के लिए संपर्क करें। आपका सहयोग हमारे लिए अमूल्य है, बहुत बहुत धन्यवाद आभार। डिस्क्लेमर : यहां पर दिया गया प्रसारित व प्रकाशित विज्ञापन/समाचार, हमें विभिन्न सूत्रों से मिली जानकारी पर आधारित है, जिसे केवल सूचना के लिए दी जा रही है drms news व संपादक इसकी पुष्टि नही करता और ना ही जिम्मेदार है।
0 टिप्पणियाँ