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सिर्फ कागजों पर दौड़ी सड़क, जमीन पर आज भी 'वनवास'!

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drms news (मानपुर-उमरिया) क्या आपने कभी सुना है कि सुशासन और विकास के दावों के बीच,  सड़क पूरी बन गई, भुगतान भी हो गया, लेकिन हकीकत में जमीन पर एक मुरुम तक नहीं बिछी ....?  जी हां, अनियमितता का एक ऐसा ही हैरान करने वाला मामला प्रकाश में आया है, बीड के पलझा उत्तर से कोठियां मार्ग का ....!

यह जानकारी विधानसभा क्षेत्र के जागरूक नागरिक मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि करीब 7 लाख की लागत और 3 किलोमीटर की इस सड़क को वन विभाग के जरिए बनाया जाना था, लेकिन खेल ऐसा हुआ कि प्रभारी बदले, फाइलें घूमीं और बजट भी 'साफ' हो गया। आज आलम यह है कि आदिवासी गौड़ समाज के लोग उसी बदहाल रास्ते पर चलने को मजबूर हैं।

अनियमितता की दहलीज पर सोता ...!

श्री श्रीवास्तव ने कहा कि रास्ता कोई सामान्य पगडंडी नहीं, बल्कि सरकारी कागजों में चमकती हुई 3 किलोमीटर की सड़क है। बीड की पलझा उत्तर पनपथा से कोठियां तक जाने वाला यह मार्ग आज भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। करीब 7 लाख की लागत से इस मार्ग का उन्नयन वन विभाग को करना था, लेकिन यहां विकास के नाम पर सिर्फ अनियमितता की फसल लहलहा रही है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस काम के लिए आवंटित राशि का पूरा भुगतान हो चुका है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि सड़क आज भी अधूरी है। बताया जा रहा है कि काम के दौरान ही बीड प्रभारी और कार्य प्रभारी का स्थानांतरण हो गया, जिसका फायदा उठाकर पूरी योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। सबसे ज्यादा प्रभावित यहां का आदिवासी गौड़ समाज है, जो आज भी बुनियादी सुविधाओं और सरकारी योजनाओं के लाभ से कोसों दूर है।

ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन कुंभकर्णीय नींद में सोया हुआ है। कई बार शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी जांच के नाम पर सिर्फ पल्ला झाड़ रहे हैं। आखिर किसकी शह पर यह बंदरबांट हुई ......? क्यों बिना काम पूरा किए भुगतान की फाइलें पास कर दी गईं ....? ये वो सवाल हैं जिनका जवाब पूरा इलाका मांग रहा है।

पत्रकारों की टीम यहां पहुंची और  देखा तो पाया कि जगह जगह मुरुम के  ढेर लगे है और न तो फैलाव हुआ और न ही सड़क बनी इससे साफ जाहिर है की अनियमिता हुई  है और तो और कुछ जगह सड़क बनी तो कराए गए कार्य का भुगतान भी मजदूरों का नहीं हुआ। 

डिप्टी रेंजर का फोन नही उठा ...

इस मामले में जब डिप्टी रेंजर मिलन सिंह से सम्पर्क साधने की कोशिश की गई तो वो दूरियां बनाते हुए फोन उठाना ही मुनासिब ही नहीं समझा। जब बात बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर तक पहुंची तो वो जल्द से जल्द जांच कराकर कार्यवाही करके सड़क के पैसों की रिकबरी करने की बात कही, जिससे साफ जाहिर है कि शासन की ओर से आने वाले सड़क का पैसा हरण करने वाले डिप्टी रेंजर मिलन सिंह की मनमानी और दबंगई ज़ोरों पर है।

अब देखना यह होगा कि इस खबर के बाद क्या प्रशासन जागता है या फिर इन आदिवासियों की किस्मत इसी ऊबड़-खाबड़ रास्ते पर दम तोड़ती रहेगी। कागजी सड़क,7 लाख का बंदरबांट', कुंभकर्णीय नींद, दोषियों पर कार्रवाई और सड़क का निर्माण तुरंत शुरू करने की मांग स्थानीय आक्रोशित पीड़ित लोगों के दिलो-दिमाग में उठ रही है।    

संपादक वीरेन्द्र प्रताप सिंह कृपया http://www.drmsnews.online वेबसाइट को शेयर, लाईक व लाइव जरूर करें और विज्ञापन व समाचारों के लिए संपर्क करें। आपका सहयोग हमारे लिए अमूल्य है, बहुत बहुत धन्यवाद आभार। डिस्क्लेमर : यहां पर दिया गया प्रसारित व प्रकाशित विज्ञापन/समाचार, हमें विभिन्न सूत्रों से मिली जानकारी पर आधारित है, जिसे केवल सूचना के लिए दी जा रही है drms newsसंपादक इसकी पुष्टि नही करता और ना ही जिम्मेदार है।

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