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खैरहा सेक्टर-5 में 'जल गंगा संवर्द्धन अभियान` का प्रभावी आयोजन, जनसहभागिता से संवरता जल संरक्षण का संदेश

संपादक वीरेन्द्र प्रताप सिंह कृपया http://www.drmsnews.online वेबसाइट को शेयर, लाईक व लाइव जरूर करें और विज्ञापन व समाचारों के लिए संपर्क करें

drms news (शहडोल)जल ही जीवन है—इस मूल मंत्र को आत्मसात करते हुए शहडोल जिले के खैरहा सेक्टर-5 में 'जल गंगा संवर्द्धन अभियान` के द्वितीय चरण के अंतर्गत एक व्यापक और जनसहभागिता आधारित कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अभियान के तहत धनपुरी नगर क्षेत्र के वार्ड क्रमांक-1, सरईकांपा रोड स्थित तालाब की साफ-सफाई कर उसे पुनर्जीवित करने का सार्थक प्रयास किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य न केवल जल स्रोतों की स्वच्छता सुनिश्चित करना था, बल्कि समाज में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना भी रहा।

इस अवसर पर तालाब परिसर में विशेष रूप से पवित्र नदियों—गंगा, यमुना एवं नर्मदा के जल का प्रतीकात्मक मिश्रण कर विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इस धार्मिक और सांस्कृतिक पहल के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया गया कि जल स्रोत केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि हमारी आस्था और संस्कृति के अभिन्न अंग भी हैं। इस आयोजन ने उपस्थित जनसमूह में भावनात्मक जुड़ाव उत्पन्न करते हुए जल संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी का बोध कराया।

कार्यक्रम के दौरान पीएचई विभाग के सब इंजीनियर संदीप जोहरी ने जल संरक्षण के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जल संकट एक गंभीर वैश्विक समस्या बन चुका है, और यदि समय रहते इसके संरक्षण के उपाय नहीं किए गए तो आने वाली पीढिय़ों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। उन्होंने स्थानीय नागरिकों से अपील की कि वे वर्षा जल संचयन को अपनाएं, जल के अनावश्यक उपयोग से बचें तथा अपने आसपास के जल स्रोतों की नियमित देखभाल करें।

इस अभियान में स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। सुभाष चौक की अध्यक्ष प्रिया वर्मा के नेतृत्व में सदस्य नेहा, सचिव अनुपमा तथा चीप हाउस की अध्यक्ष हेमा कोल ने अपने दल के साथ मिलकर तालाब के घाटों की साफ-सफाई में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके अतिरिक्त धनपुरी वार्ड क्रमांक-1 हाथीडोल क्षेत्र की पिंकी ढीमर, रवि तथा नवांकुर सखी समूह की अध्यक्ष पूजा एवं उनकी टीम ने भी श्रमदान कर अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यक्रम के दौरान श्रमदान की भावना देखते ही बन रही थी। सभी वर्गों—महिलाएं, युवा, बुजुर्ग—ने एकजुट होकर तालाब की गंदगी हटाई, कचरे का निष्पादन किया तथा घाटों को स्वच्छ एवं व्यवस्थित बनाया। इस सामूहिक प्रयास ने यह सिद्ध कर दिया कि जब समाज एकजुट होकर किसी उद्देश्य के लिए कार्य करता है, तो सकारात्मक परिवर्तन अवश्य संभव होता है।

इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि स्थानीय नागरिकों को तालाब के जल के उपयोग के प्रति जागरूक किया गया। उन्हें बताया गया कि साफ-सुथरे और संरक्षित जल स्रोत न केवल दैनिक उपयोग के लिए उपयोगी होते हैं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। इस संदेश ने लोगों को अपने आसपास के जल स्रोतों के प्रति जिम्मेदार बनने के लिए प्रेरित किया।

विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे-छोटे जल स्रोतों का संरक्षण बड़े स्तर पर जल संकट के समाधान में सहायक हो सकता है। इस दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए 'जल गंगा संवर्द्धन अभियानÓ एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभर रहा है। यह अभियान न केवल जल स्रोतों की सफाई तक सीमित है, बल्कि यह एक जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है, जिसमें आम नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि जल संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए जनसहभागिता अनिवार्य है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्तर पर जल बचाने के उपाय अपनाने होंगे—जैसे वर्षा जल संचयन, रिसाव रोकना, अनावश्यक जल उपयोग से बचना एवं पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण करना।

इस अवसर पर उपस्थित नागरिकों ने भी अपने अनुभव साझा किए और इस तरह के आयोजनों की निरंतरता बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। कई लोगों ने यह सुझाव दिया कि स्कूलों एवं कॉलेजों में भी जल संरक्षण विषय पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, ताकि युवा पीढ़ी को प्रारंभ से ही इस दिशा में जागरूक किया जा सके।

'जल गंगा संवर्द्धन अभियान` के इस सफल आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि समाज और प्रशासन मिलकर कार्य करें, तो जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर ठोस परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। खैरहा सेक्टर-5 में आयोजित यह कार्यक्रम अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक प्रेरणास्रोत बन सकता है।

अंतत:, यह कहा जा सकता है कि इस अभियान ने न केवल एक तालाब की साफ-सफाई की, बल्कि लोगों के मन में जल संरक्षण के प्रति एक नई चेतना भी जगाई है। यदि इसी प्रकार के प्रयास निरंतर जारी रहे, तो आने वाले समय में जल संकट की चुनौती से निपटने में निश्चित रूप से सफलता प्राप्त की जा सकती है।

संपादक वीरेन्द्र प्रताप सिंह कृपया http://www.drmsnews.online वेबसाइट को शेयर, लाईक व लाइव जरूर करें और विज्ञापन व समाचारों के लिए संपर्क करें। आपका सहयोग हमारे लिए अमूल्य है, बहुत बहुत धन्यवाद आभार। डिस्क्लेमर : यहां पर दिया गया प्रसारित व प्रकाशित विज्ञापन/समाचार, हमें विभिन्न सूत्रों से मिली जानकारी पर आधारित है, जिसे केवल सूचना के लिए दी जा रही है drms newsसंपादक इसकी पुष्टि नही करता और ना ही जिम्मेदार है।

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