
drms news (मानपुर-उमरिया)। नगर परिषद मानपुर में संपत्ति कर को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। आधिकारिक पत्रों और स्थानीय स्तर पर मिल रही जानकारी से यह सामने आ रहा है कि परिषद की बैठकों में संपत्ति कर से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेकर संशोधन कर दिया गया, लेकिन पूरी प्रक्रिया आम जनता से लगभग छिपाकर रखी गई
समाज सेवी मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब कर निर्धारण जैसा अहम निर्णय लिया जा रहा था, तब जनता को न जानकारी दी गई और न ही दावा-आपत्ति का अवसर दिया गया। नवगठित नगर परिषद होने और जीआईएस सर्वे की जानकारी के अभाव में अधिकांश नागरिक यह समझ ही नहीं पाए कि उनके मकानों का सर्वे किया जा रहा है और उसी के आधार पर कर तय होगा। इसी कारण लोग समय रहते आपत्ति दर्ज नहीं करा सके।
अब जब संशोधन किया गया है, तो नगरवासियों की मांग और तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि “संपत्ति कर हमें जमा करना है, न कि परिषद के अध्यक्ष और सीएमओ को, इसलिए इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए और हमें दावा-आपत्ति का अवसर दिया जाए।”स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जोनवार दरें, वार्ड अनुसार कर निर्धारण, कच्चे-पक्के मकानों के अलग प्रावधान, मुख्य मार्ग की दरें तथा विकास कर सहित अन्य करों की जानकारी अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है। इससे पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इसके साथ ही एक और बड़ा मुद्दा सामने आया है कि परिषद की बैठक में संपत्ति कर की गणना पद्धति को वर्गमीटर से बदलकर वर्गफीट कर दिया गया, लेकिन इसके बाद वास्तविक दरें क्या लागू की गईं—यह अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया। नगर को कितने जोनों में विभाजित किया गया, कच्चे मकान, पक्के मकान, टीन शेड और रिक्त भूमि पर कितना कर निर्धारित किया गया, तथा पहले से लागू कर में जनता के हित में कितना बदलाव या कमी की गई—इन सभी बिंदुओं पर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
नगर वासियों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि “विकास” के नाम पर टैक्स वसूला जा रहा है, जबकि स्वच्छ पानी, 24 घंटे बिजली, बस स्टैंड, चिल्ड्रन पार्क और चौपाटी जैसी बुनियादी सुविधाएं अब तक धरातल पर नजर नहीं आ रही हैं।विवाद को और गंभीर बनाता है कोरोना काल (2020-21) का संपत्ति कर, जिसे भी अब जनता से वसूला जा रहा है। लोगों का कहना है कि महामारी के कठिन समय का कर थोपना पूरी तरह अनुचित है।
वहीं पूर्व सरपंच एवं समाजसेवी शारदा प्रसाद गौतम ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि मानपुर को दिसंबर 2020 में नगर परिषद का दर्जा मिला और जुलाई 2022 में चुनाव के बाद ही नगर सरकार का गठन हुआ। ऐसे में 2020 से कर वसूली का आधार स्पष्ट किया जाना चाहिए।
इस पूरे मामले में नगर परिषद के सीएमओ का कहना है कि संपत्ति कर संशोधन की सार्वजनिक सूचना जारी की जाएगी, लेकिन दावा-आपत्ति नहीं मंगाई जाएगी, क्योंकि यह संशोधन परिषद के निर्णय के आधार पर किया गया है।
अब नगरवासियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही संपत्ति कर निर्धारण की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई और पुनः दावा-आपत्ति की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो व्यापक जनांदोलन किया जाएगा।मानपुर में बढ़ते आक्रोश के बीच अब देखना होगा कि नगर परिषद प्रशासन जनता की मांगों पर क्या रुख अपनाता है।
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