
drms news (मानपुर उमरिया)। उमरिया को एक स्वच्छ और व्यवस्थित शहर बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने बड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। कलेक्ट्रेट सभागार में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की जिला स्तरीय निगरानी समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए कलेक्टर श्रीमती राखी सहाय ने सभी नगरीय निकायों, जनपद पंचायतों और ग्राम पंचायतों को ठोस कचरे के वैज्ञानिक निपटान के लिए तत्काल समुचित व्यवस्थाएं करने के कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उमरिया एक तेजी से बढ़ता हुआ शहर है, इसलिए भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए सभी को अभी से सजग होना होगा।
बंद गाड़ियों में ही उठेगा कचरा; कार्यालयों में भी रखने होंगे अलग डस्टबिन
कलेक्टर श्रीमती राखी सहाय ने स्वच्छता व्यवस्था को लेकर अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों की सामूहिक भागीदारी पर जोर दिया।
सोर्स सेग्रीगेशन (कचरा पृथक्कीकरण): सभी नगरीय निकाय घरों और सार्वजनिक स्थलों से गीला कचरा, सूखा कचरा तथा अन्य कचरे का अलग-अलग संग्रहण सुनिश्चित करें। किसी भी स्थिति में कचरा सड़कों पर नहीं फेंका जाना चाहिए।
कचरा वाहनों का प्रबंधन: जिन नगरीय निकायों के पास पर्याप्त मात्रा में कचरा वाहन उपलब्ध नहीं हैं, वे तुरंत नए वाहनों की मांग भेजें। यह सुनिश्चित किया जाए कि कचरे का उठाव केवल बंद गाड़ियों में ही हो।
एसटीपी (STP) के लिए भूमि आवंटन: नगरीय निकायों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों (CMOs) को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के एसडीएम (SDM) से समन्वय स्थापित कर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) निर्माण के लिए उपयुक्त सरकारी भूमि का आवंटन जल्द से जल्द कराएं।
कार्यालयों के लिए नियम: जिले के सभी शासकीय और निजी कार्यालयों में भी अलग-अलग डस्टबिन रखकर सूखे और गीले कचरे का अलग संग्रहण करना अनिवार्य होगा।
1 अप्रैल 2026 से लागू हुआ नया एक्ट, 4 चरणों में होगी मॉनिटरिंग
बैठक में अपर कलेक्टर एवं प्रभारी जिला शहरी विकास अभिकरण प्रमोद कुमार सेन गुप्ता ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के कानूनी पहलुओं और तकनीकी नियमों के संबंध में विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि नया एक्ट लागू है। जिले में 1 अप्रैल 2026 से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का नया सख्त अधिनियम प्रभावी हो चुका है। इसके तहत प्रत्येक संस्थान, कार्यालय और घर से कचरे को अलग-अलग करके देना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
फोर-टियर ट्रैकिंग (चार चरणों में निगरानी): नए नियमों के अंतर्गत अब कचरे के उत्पादन , प्रसंस्करण (और अंतिम निपटानकी कड़ाई से निगरानी की जाएगी।
लीगेसी डंप साइट्स का उपचार: पुराने डंपिंग यार्डों में जमा कचरे के पहाड़ों को समाप्त करने के लिए बायोमाइनिंग (Biomining) एवं बायो रेमेडिऐशन (Bioremediation) की प्रक्रिया को भी निगरानी के दायरे में लाया गया है।
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