
तिवनी से निकली विशाल रैली, बाबा भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर किया पुष्प माल्यार्पण संपादक वीरेन्द्र प्रताप सिंह कृपया http://www.drmsnews.in वेबसाइट को शेयर, लाईक व लाइव जरूर करें और विज्ञापन व समाचारों के लिए संपर्क करें
drms news (मानपुर उमरिया)। जिले के पाली ब्लॉक में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर बिरसिंहपुर पाली विद्यालय मैदान में आयोजित विश्व आदिवासी दिवस अपनी मूल परंपराओं, के अनुरूप कार्यक्रम का आयोजन समिति द्वारा किया गया। आदिवासी समाज का यह कार्यक्रम अपनी संस्कृति और भव्यता के साथ संपंन हुआ।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि मानपुर विधानसभा क्षेत्र की विधायक सुश्री मीना सिंह विशिष्ठ अतिथि महाविद्यालय प्राचार्य हरलाल अहिरवार, पूर्व प्राचार्य डॉ. गंगाधर ढोके, लोकनाथ सिंह मरावी, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला हेमनाथ बैगा ने की जब की सफल मंच संचालन विनय सिंह परस्ते राजेश कोल कार्यक्रम व्यवस्थापक बिन्दे की भूमिका सराहनीय रही।
कार्यक्रम की शुरुआत आदिवासी समाज के अमर शहीदों के छायाचित्रों में दीप प्रज्ज्वलित करते हुए की गयी। मालुम होवे की विश्व आदिवासी दिवस पर पाली क्षेत्र के तिवनी ग्राम से शुरू हुई आदिवासी रैली पाली नगर का भ्रमण करते हुए विद्यालय में आम सभा में तब्दील हो गयी। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जन प्रतिनिधि गण,ग्रामीण जन, युवा, वृद्ध और महिलाएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मानपुर क्षेत्र की विधायक सुश्री मीना सिंह ने आसंदी से संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी समाज का आजादी की लड़ाई में अक्षुण्य योगदान रहा है। हम अंग्रेजों की हुकूमत के आगे नहीं झुके, शहीद हो गए। उन्होंनें छात्र छात्राओं के सफलता के मंत्र बतलाते हुए कहा कि आदिवासी समाज में कला, शिक्षा और साहस का अद्भुत संगम भरा हुआ है,उसे आप सतत प्रयास से निखारें।
आपने आगे कहा कि मैं खुद दूरस्थ गाँव में जन्म लेने वाली आदिवासी समाज की बेटी हूँ पहाड़ के नीचे मेरा गांव है। कठिन संघर्ष के बाद कक्षा आठवीं की पढ़ाई के बाद यहाँ से 200 किलोमीटर दूर मंडला के ठाकर आश्रम में रहकर की है। उस समय आदिवासी समाज शिक्षा से कोसों दूर था, तब भी हमारे माता पिता ने मुख्य धारा से जोड़ने के लिए शिक्षा को अपनाया, कितने कठिन दौर में भी अपनी जिम्मेदारी निभाई गई।
पूर्व मंत्री विधायक सुश्री मीना सिंह ने कहा कि वर्तमान में शिक्षा की सुविधा उपलब्ध है। अब गांव की प्रतिभा को निखारने की जरूरत है। माता-पिता अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करें। माँ का योगदान बच्चों के लिए सर्वाधिक रहता है। शिक्षा के लिए अपना सब कुछ लगा कर पढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम प्रकृति के पूजारी हैं। अपनी परंपरा और प्रकृति को बचाएं।
हमें पूर्वजों की धरोहरों को संजोने के लिए आज संकल्प लेना चाहिए। इसी से हम जाने जाते हैं। हमें अपनी जाति को नहीं छुपाना है, वह हमारी पहचान है। आदिवासी आदि अनादि है। अपने मूल को शान से आगे बढ़ाने के संकल्पित है अंत में उन्होंने कहा "मैं आपके समाज से हूं। मेरे लायक जो काम हो वह मुझसे कह सकती हैं, उनका हर संभव निदान करूंगी।
विशेष अतिथि पूर्व प्राचार्य डॉ. गंगाधर ढोके ने कहा कि 1994 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने आदिवासियों के सम्मान के लिए यह दिवस घोषित किया। आदिवासी समाज ही है जो प्रकृति की पूजा करते हुए उसको सुरक्षित रखा। उन्होंने चिंता जताई कि गोडी बोली विलुप्त हो रही है। जब भाषा विलुप्त होती है तो संस्कृति भी विलुप्त हो जाती है। उन्होंने कहा आदिवासी समाज में एक भी दहेज हत्या नहीं होती है। युवाओं से उन्होंने रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ने और अपने समुदाय को भी रोजगार उपलब्ध कराने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अन्य वक्ताओं में अपने अपने विचार रखते हुए
राजेश कोल ने कहा कि जय जोहार का मतलब प्रकृति पूजा है। संयुक्त राष्ट्र ने 1984 में इसकी घोषणा की और 1995 से लागू किया। प्रो. हर लाल अहिरवार ने कहा कि हम प्रकृति के पूजारी हैं। प्रगति के साथ-साथ प्रकृति को आगे बढ़ाना है।
अधिवक्ता रेखा कोल ने कहा कि आधुनिकता के दौर में संस्कृति को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने समान नागरिक संहिता में आदिवासियों के लिए अलग कॉलम की मांग की। सरपंच पुरुषोत्तम सिंह ने कहा कि युवा शराब के नशे में पीड़ित हैं। उन्होंने "नशा छोड़ो, शिक्षा पकड़ो" का नारा दिया। पूर्व सरपंच लोकनाथ सिंह ने कहा कि जीवन की संस्कृति को नहीं भूलना है। सबको एक होकर समाज का काम करना चाहिए।
अंजली सिंह ने कहा कि एकता से ही हम आगे बढ़ेंगे। शराब से दूर रहें, इससे भविष्य बरबाद हो रहा है। युवाओं से कहा कि आप अपना भविष्य खुद गढ़ो। दलबीर सिंह ने कहा कि जल, जंगल, जमीन पर हमारा अधिकार है। शिक्षा ही युवाओं को जोड़ेगी। समाज के मुखियाओं से छात्रावास जाकर बच्चों की देख-रेख करने की अपील की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जिला पंचायत सदस्य हेमनाथ बैगा ने अध्यक्षीय उद्बोधन में सभी वक्ताओं के विचारों की सराहना की और उपस्थित समुदाय का आभार व्यक्त किया। आपने कहा कि आदिवासी दिवस पर यह आदिवासियों का पर्व हैं, आदिवासी अपनी सभ्यता का पालन करते हुए अपनी मूल परंपराओं को आगे बढ़ाना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में आयोजन समिति ने सभी अतिथियों और उपस्थित जन समुदाय का धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस दौरान कार्यक्रम में मुख्य रूप से सर्व आदिवासी समाज हेमनाथ बैगा जिला पंचायत सदस्य, बिन्दे सिंह, राजेश कोल, विनय सिंह परस्ते अजाक्स ब्लॉक अध्यक्ष लोकनाथ सिंह मरावी,जयस जिलाध्यक्ष उमरिया दलबीर सिंह पसरते, राजेश कोल,छत्रपाल सिंह, सरपंच लक्ष्मी सिंह मरावी,पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष उषा कोल, जयस कार्यवाहक जिलाध्यक्ष उमेश सिंह मरकाम, धनराज सिंह, मनोज चौधरी, संतोष मानिकपुरी, राजेन्द्र सिंह, लालमणि मालवे, राजकुमार सिंह, हरिभजन सिंह, कूपरचंद बैगा, रवि मार्को, उदय सिंह, सानू सिंह मुकेश खुरसेगा, किसन सिंह मरावी, सुखदेव सिंह, पुरुसोत्तम सिंह बड़करे, अजाक्स महासचिव इस्वर सिंह, गोविंद सिंह, बोधपाल सिंह, बालकदास टेकाम, कोमल मालवे, सुरेंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह, तोलाराम सिंह टेकाम, पुरुसोत्तम सिंह, रमेश सिंह परस्ते, बल्लू पेंड्राम, शिवकुमार मालवे, राजेश धुर्वे, राजेश सिंह, राकेश सिंह उइके, रोहित प्रधान, विवेकानंद सिंह, भूपत सिंह, बबलू सिंह, मनोज कोल,भागचंद कोल, रविन्द्र सिंह मार्को, रामपाल सिंह परस्ते, पवन कुमार, भइयालाल, कृष्ना बैगा, विद्या निधान, वृजभान सिंह मार्को, दसरू प्रधान, चद्रलाल प्रधान, श्याम सिंग प्रधान, चंद्रभान सिंह बिझला, नीरज सिंह अवधेश कोल, मुकेश कोल, दीपक सिंह, मना सिंह आयुष कोल आकाश कोल संजीव कोल, रेखा कोल, रामदीन बैगा, सदन सिंह सुलभ मजुमदा अजय चौधरी निधेष सिंह दुखीराम कोल सहित हजारों आदिवासी सर्व समाज के कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सौजन्य से मनोज श्रीवास्तव, केशव विश्वकर्मा
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