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बांधवगढ़, कान्हा, संजय गांधी और अचानकमार टाइगर रिजर्व के बीच वन्यजीवों की आवाजाही में महत्वपूर्ण है शहडोल का वन क्षेत्र

घने जंगल, पर्याप्त पानी और भोजन वन्यजीवों को करते हैं आकर्षित, वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही में शहडोल की अहम भूमिका

शहडोल 24 अक्टूबर 2026- शहडोल जिला अपनी समृद्ध वन संपदा और जैव विविधता के लिए विशेष पहचान रखता है। जिले के घने जंगल बाघों, हाथियों सहित अन्य वन्यप्राणियों की आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक गलियारे के रूप में कार्य करते हैं। यही कारण है कि शहडोल के जंगलों में बाघ, हाथी, तेंदुए और भालू सहित विभिन्न वन्यप्राणियों की मौजूदगी और उनकी आवाजाही समय-समय पर देखने को मिलती है।

शहडोल जिला स्वयं टाइगर रिजर्व नहीं है, लेकिन इसकी भौगोलिक स्थिति वन्यजीवों के स्वतंत्र विचरण के लिए महत्वपूर्ण है। जिले का वन क्षेत्र उमरिया जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, कान्हा टाइगर रिजर्व, सीधी जिले के संजय गांधी टाइगर रिजर्व तथा छत्तीसगढ़ के अचानकमार टाइगर रिजर्व से जुड़े वन्यजीव गलियारों के लिहाज से महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

वन्यजीवों की आवाजाही का महत्वपूर्ण मार्ग

शहडोल के जंगल बाघ और हाथी जैसे वन्यप्राणियों के लिए एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक मार्ग हैं। इन जंगलों से होकर वन्यप्राणी एक वन क्षेत्र से दूसरे वन क्षेत्र तक विचरण करते हैं। दक्षिण वन मंडल का वन क्षेत्र विशेष रूप से अचानकमार, बांधवगढ़ और कान्हा टाइगर रिजर्व से जुड़े वन्यजीव गलियारों के लिए महत्वपूर्ण है।

वन्यजीवों की आवाजाही प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा है। बाघ अपने क्षेत्र का विस्तार करने, नए आवास तलाशने और भोजन की उपलब्धता के अनुसार दूसरे वन क्षेत्रों तक पहुंच सकते हैं। इसी तरह हाथी भी अपने पारंपरिक मार्गों से लंबी दूरी तय करते हैं। शहडोल के वन क्षेत्र इन वन्यप्राणियों की आवाजाही में महत्वपूर्ण कड़ी का कार्य करते हैं।

बांधवगढ़ में हाथियों की मौजूदगी में शहडोल के गलियारे की अहम भूमिका

उमरिया जिले का बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व बाघों के लिए प्रसिद्ध है। यहां हाथियों की मौजूदगी भी वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। छत्तीसगढ़ से हाथियों की आवाजाही अनूपपुर और शहडोल के वन क्षेत्रों से होकर बांधवगढ़ तक पहुंचने के लिए महत्वपूर्ण रही है। वर्ष 2018 के आसपास बांधवगढ़ क्षेत्र में हाथियों का आगमन शुरू होने के बाद यहां उनकी मौजूदगी लगातार वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बनी हुई है।

वन्यजीव गलियारों का संरक्षण जरूरी

वन्यजीव गलियारे ऐसे प्राकृतिक मार्ग होते हैं, जिनके माध्यम से वन्यप्राणी एक जंगल से दूसरे जंगल तक स्वतंत्र रूप से आ-जा सकते हैं। इन मार्गों में वन क्षेत्र के साथ नदियां, पहाड़ियां, गांव और आबादी वाले क्षेत्र भी शामिल हो सकते हैं। गलियारों के सुरक्षित रहने से वन्यजीवों को आवागमन में सुविधा मिलती है और अलग-अलग वन क्षेत्रों के बीच संपर्क बना रहता है।

यदि इन मार्गों पर जंगलों की कटाई, निर्माण कार्य अथवा अन्य गतिविधियों से व्यवधान उत्पन्न होता है, तो वन्यजीवों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। इससे मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की आशंका भी बढ़ सकती है। इसलिए वन्यजीव गलियारों का संरक्षण जैव विविधता को बनाए रखने के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष से बचाव के लिए सतर्कता आवश्यक

हाथियों और बाघों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में ग्रामीणों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। जंगल अथवा गांव के आसपास वन्यजीव दिखाई देने पर उनके नजदीक जाने, उन्हें घेरने या उकसाने से बचना चाहिए तथा वन विभाग को सूचना देनी चाहिए। वन क्षेत्रों में प्राकृतिक आवास, पानी और भोजन की उपलब्धता बनाए रखना भी वन्यजीव संरक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

प्राकृतिक संपदा शहडोल की महत्वपूर्ण पहचान

शहडोल के घने और विविधतापूर्ण जंगल वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। साल के वन, पानी के प्राकृतिक स्रोत और भोजन की उपलब्धता अनेक वन्यप्राणियों के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाते हैं। शहडोल, अनूपपुर और उमरिया के वन क्षेत्रों का संरक्षण पूरे संभाग की प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाता है।

शहडोल के जंगल बाघों और हाथियों के लिए प्राकृतिक गलियारा, चार टाइगर रिजर्व को जोड़ता है जिला

इस प्रकार शहडोल जिला मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण वन क्षेत्रों के बीच वन्यजीवों की आवाजाही की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। प्राकृतिक वन्यजीव गलियारों को सुरक्षित रखना वन्यप्राणियों के संरक्षण, जैव विविधता को बनाए रखने और मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

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