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योग ज्ञान की वह विधा है, जो लोगों को लोगों से जोड़ने का कार्य करता है : माननीय कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी

जनजातीय विश्वविद्यालय में सप्त दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का हुआ समापान

संपादक वीरेन्द्र प्रताप सिंह DRMS NEWS 896263793 

DRMS NEWS अमरकंटक इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक के योग व मनोविज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में सप्त दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के समारोप समारम्भ की अध्यक्षता करते हुए माननीय कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी ने कहा की योग ज्ञान की वह विधा है, जो लोगो को लोगों से जोड़ने का कार्य करता है। 

जन्म के साथ बालक परिवार के साथ, आगे संस्था के साथ, उससे भी आगे व्यष्टि से समष्टि तक जुड़ना ही योग है। अष्टांग योग में योग चित्त वृति निरोधः और भगवद गीता के योगः कर्मसु कौशलम, योग के आशय को स्पष्ट करता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में गुणवत्तापूर्ण शोध की बात की गयी है, और शोध के तथ्य संस्थापयोगी, लोक कल्याणकारी, समाजोपयोगी और राष्ट्रोपयोगी होना चाहिए। 

योग में अनुसन्धान विधि विषयक कार्यशाला निश्चित ही प्रतिभागियों के लिए एक उपादेय सिद्ध हुई

राष्ट्रीय कार्यशाला के मुख्य अतिथि श्रीश्री विश्वविद्यालय कटक, उड़ीसा के माननीय कुलपति प्रो. बी. आर. शर्मा ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा की योग में अनुसन्धान विधि विषयक कार्यशाला निश्चित ही प्रतिभागियों के लिए एक उपादेय कार्यक्रम सिद्ध हुई है।

योग के क्षेत्र में शोध क्या है….? इस यक्ष प्रश्न के उत्तर के सम्बन्ध में यह कहा जा सकता है की जो हमारे पास है उसकी वैधता स्थापित करना ही योग के क्षेत्र में शोध होगा। प्रो. आलोक श्रोत्रीय ने स्वागत भाषण दिए। समीक्षा प्रतिवेदन कार्यक्रम समन्वयक डॉ. हरे राम पाण्डेय ने प्रस्तुत किया। 

समारोप समारम्भ में स्वास्ति वाचन डॉ. त्रयम्बक नाथ पाण्डेय तथा डॉ. सचिन द्रिवेदी ने संपन्न किया। कार्यक्रम का संचालन योग विभाग के सहायक आचार्य डॉ. प्रवीन कुमार गुप्ता ने तथा कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों के प्रति आभार ज्ञापन सह-संयोजक डॉ. ललित कुमार मिश्र ने प्रेषित किया। 

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