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संपत्ति कर संशोधन पर असमंजस, मानपुर में बढ़ता जनाक्रोश जानकारी दो, नहीं तो आंदोलन होगा

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drms news (मानपुर-उमरिया)आम नागरिकों के लिए भारी परेशानी का सबब बनी संपत्ति कर नगर परिषद मानपुर में संपत्ति कर की भारी बढ़ोतरी अब एक गंभीर जन-मुद्दे में तब्दील हो चुकी है। बिना किसी स्पष्ट पूर्व सूचना के नागरिकों के मोबाइल पर पहुंचे बढ़े हुए टैक्स के मैसेज ने शहर में हड़कंप मचा दिया है। हर तरफ एक ही सवाल है— "जब टैक्स का भुगतान जनता को करना है, तो प्रक्रिया को गुप्त क्यों रखा जा रहा है ...?

परिषद की बैठक के फैसले ठंडे बस्ते में ...?

समाजसेवी मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि बीती 25 फरवरी 2026 को हुई परिषद की बैठक में सभी पार्षदों ने एकमत होकर भारी-भरकम टैक्स पर आपत्ति जताई थी। उस समय संशोधन पर सहमति भी बनी थी, लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद भी संशोधित प्रस्ताव का सार्वजनिक न होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है। नगर परिषद अध्यक्ष भारती सतीश सोनी ने जांच के आदेश तो दिए, लेकिन न तो अब तक जांच की स्थिति स्पष्ट हुई और न ही संशोधित टैक्स की जानकारी सार्वजनिक की गई।

प्रशासन के विरोधाभासी बयानों से गहराया संदेह; संशोधन के नाम पर पारदर्शिता से खिलवाड़ का आरोप

श्री श्रीवास्तव का कहना है कि कोई कह रहा 'प्रस्ताव भोपाल में', कोई कह रहा 'सूचना जरूरी नहीं'हैरानी की बात यह है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर जिम्मेदार अधिकारियों के बयानों में भारी विरोधाभास है। राजस्व प्रभारी हरीश नामदेव का तर्क है कि टैक्स प्रणाली वर्गमीटर से वर्गफीट में बदलने से कर कम हुआ है, इसलिए सार्वजनिक सूचना की आवश्यकता नहीं है। वहीं, नगर परिषद अधिकारी राजेंद्र कुशवाहा का कहना है कि प्रस्ताव अभी भोपाल भेजा गया है। इन विरोधाभासी दावों ने जनता के बीच अविश्वास की खाई को और चौड़ा कर दिया है।

विपक्ष और युवा नेताओं ने दी आंदोलन की चेतावनी

नगर परिषद की उपाध्यक्ष गीता ज्ञान प्रकाश पटेल और पार्षद पुष्पा शारदा गौतम ने पहले ही मुख्य नगर पालिका अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की थी उधर, युवा नेता विजय गौतम ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि, "जनता से जानकारी छिपाना प्रशासन की नीयत पर संदेह पैदा करता है। संशोधित विवरणिका तत्काल सार्वजनिक होनी चाहिए।"

जनता को 'दावा-आपत्ति' का मिले संवैधानिक अधिकार

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पूर्व में जीआईएस (GIS) सर्वे के दौरान जानकारी के अभाव में कई लोग अपनी आपत्तियां दर्ज नहीं करा पाए थे। अब संशोधन के नाम पर वही इतिहास दोहराया जा रहा है। नागरिकों की स्पष्ट मांग है कि प्रत्येक वार्ड में संशोधित टैक्स की सूची चस्पा की जाए एवं मौलिक अधिकारों के तहत दावा-आपत्ति के लिए निश्चित समय दिया जाए साथ ही संपूर्ण प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए जब तक टैक्स निर्धारण प्रक्रिया पारदर्शी नहीं होगी, तब तक आम जनता का भरोसा बहाल नहीं हो सकता। हमें बंद कमरों के फैसले नहीं, सार्वजनिक स्पष्टता चाहिए।"

अब देखना होगा कि क्या नगर परिषद मानपुर केवल मैसेज के जरिए फरमान सुनाएगी, या लोकतंत्र में जनता की भागीदारी और पारदर्शिता को सम्मान दिया जाएगा ... ? शहर की जनता अब सीधे जवाब का इंतजार कर रही है।

संपादक वीरेन्द्र प्रताप सिंह कृपया http://www.drmsnews.online वेबसाइट को शेयर, लाईक व लाइव जरूर करें और विज्ञापन व समाचारों के लिए संपर्क करें। आपका सहयोग हमारे लिए अमूल्य है, बहुत बहुत धन्यवाद आभार। डिस्क्लेमर : यहां पर दिया गया प्रसारित व प्रकाशित विज्ञापन/समाचार, हमें विभिन्न सूत्रों से मिली जानकारी पर आधारित है, जिसे केवल सूचना के लिए दी जा रही है drms newsसंपादक इसकी पुष्टि नही करता और ना ही जिम्मेदार है।

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