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गरीबों की उम्मीदों पर फिरा पानी! 722 आवेदन, लेकिन शादी सिर्फ 78 जोड़ों की—मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के क्रियान्वयन पर उठे गंभीर सवाल


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drms news (मानपुर उमरिया) जनपद पंचायत मानपुर द्वारा सोमवार को ग्रामीण खेल मैदान में आयोजित मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह सम्मेलन का उद्देश्य गरीब परिवारों की बेटियों का विवाह सम्मानपूर्वक कराना था। मंच पर 78 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ, लेकिन दूसरी ओर बड़ी संख्या में ऐसे परिवार भी पहुंचे जिन्हें कार्यक्रम स्थल पर जाकर पता चला कि उनका नाम चयनित सूची में नहीं है। इससे कई गरीब परिवारों में नाराजगी और मायूसी देखी गई।

मनोज श्रीवास्तव से मिली जानकारी के अनुसार, जनपद पंचायत मानपुर में 630 तथा नगर परिषद मानपुर में 92, यानी कुल 722 आवेदन प्राप्त हुए। इसके विपरीत उपलब्ध लक्ष्य के अनुसार जनपद पंचायत के 71 और नगर परिषद के 7, कुल 78 जोड़ों का ही विवाह कराया गया। शेष सैकड़ों आवेदक योजना के लाभ से वंचित रह गए।

ग्रामीण खेल मैदान में सजा विवाह मंच, लेकिन सैकड़ों गरीब परिवारों को मिली मायूसी,  समय पर सूचना नहीं मिलने से व्यवस्था पर उठे सवाल

दूर-दराज से पहुंचे कई हितग्राहियों का आरोप है कि वे 80 से 100 किलोमीटर की दूरी तय कर 4 से 5 हजार रुपये खर्च कर कार्यक्रम में पहुंचे थे। उनका कहना है कि आवेदन भरने, दस्तावेज तैयार कराने और अन्य औपचारिकताओं में भी करीब दो हजार रुपये खर्च हुए। इसके बाद कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर यह जानकारी मिली कि उनका आवेदन चयनित नहीं है।

कुछ हितग्राहियों ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम स्थल पर माइक से घोषणा कर दी गई कि "जिनका नाम सूची में नहीं है, वे वापस चले जाएं।" यदि ऐसा हुआ है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि चयनित और अपात्र हितग्राहियों को पहले से सूचना क्यों नहीं दी गई।

यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि पिछले वर्ष भी आवेदन लेने के बावजूद सम्मेलन आयोजित नहीं हो सका था। लगातार दूसरे वर्ष सामने आई ऐसी स्थिति ने योजना के क्रियान्वयन और प्रशासनिक तैयारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कहावत है—"दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंककर पीता है।" लेकिन पिछले वर्ष के अनुभवों के बाद भी यदि इस वर्ष सूचना व्यवस्था और योजना के संचालन को लेकर ऐसे सवाल उठ रहे हैं, तो यह व्यवस्था के लिए आत्ममंथन का विषय है। गरीब परिवारों का कहना है कि वे सरकार की योजनाओं पर भरोसा करके आवेदन करते हैं, लेकिन समय पर स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने से उन्हें आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी उठानी पड़ती है।

अब सवाल यह नहीं कि 78 जोड़ों का विवाह हुआ, बल्कि यह भी है कि बाकी सैकड़ों परिवारों को समय रहते सूचना क्यों नहीं मिली? यदि लक्ष्य और बजट सीमित था, तो क्या इसकी जानकारी पहले नहीं दी जानी चाहिए थी? क्या गरीब परिवारों के समय, मेहनत और पैसे की कोई कीमत नहीं है ... ?

अब लोगों की निगाहें जिला प्रशासन पर हैं कि वह पूरे मामले की समीक्षा करे, यदि कहीं सूचना देने या योजना के संचालन में चूक हुई है तो उसकी जवाबदेही तय करे, और वंचित पात्र हितग्राहियों के लिए अतिरिक्त लक्ष्य और बजट उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस पहल करे।

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