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drms news (मानपुर उमरिया)। नगर परिषद मानपुर के वार्ड क्रमांक 7 में बरसात ने विकास कार्यों की हकीकत उजागर कर दी है। जिस नाली का निर्माण पूरे नगर के वर्षा जल की निकासी के उद्देश्य से कराया गया था, वही नाली पहली ही तेज बारिश में पानी का दबाव नहीं झेल सकी। नतीजा यह है कि सड़कों पर गंदा पानी बह रहा है, गलियां कीचड़ और कचरे से लबालब हैं तथा वार्डवासी दुर्गंध और जलभराव के बीच जीवन जीने को मजबूर हैं। लोगों का कहना है कि "भुगतान हो गया, अब भुगत रहे हम।"
समाज सेवी मनोज श्रीवास्तव व केशव प्रसाद विश्वकर्मा ने बताया कि यहां के वार्डवासियों का आरोप है कि उक्त नाली का निर्माण संविदाकार ज्ञानेंद्र सिंह गहरवार के माध्यम से कराया गया, जबकि नगर परिषद में अकाउंटेंट के सहायक के रूप में कार्यरत शिवम गुप्ता ने निर्माण कार्य के समन्वय और भुगतान प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्थानीय लोगों का दावा है कि निर्माण कार्य में कथित अनियमितताओं के बावजूद संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से कार्य पूर्ण दर्शाकर भुगतान भी कर दिया गया। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इनकी निष्पक्ष जांच होना शेष है।
रहवासियों के अनुसार नाली निर्माण में कई स्थानों पर एक ओर दीवार तक नहीं बनाई गई और सीधे सीसी सड़क पर स्लैब डालकर ढंक दिया गया। इतना ही नहीं, अधिकांश हिस्सों में नाली की चौड़ाई लगभग एक फीट या उससे भी कम रखी गई, जबकि वर्षों से बस स्टैंड सहित नगर के बड़े हिस्से का वर्षा जल इसी मार्ग से निकलता रहा है। ऐसे में लोगों का सवाल है कि आखिर इतने महत्वपूर्ण ड्रेनेज मार्ग पर इतनी संकरी नाली किस आधार पर बनाई गई।
इस पूरे मामले में नगर परिषद के सीएमओ और उपयंत्री की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। यदि निर्माण कार्य के दौरान नियमित निरीक्षण किया गया था तो इतनी गंभीर तकनीकी खामियां अधिकारियों की नजर से कैसे बच गईं? और यदि निरीक्षण नहीं किया गया तो सरकारी निर्माण कार्यों की निगरानी आखिर किसके भरोसे छोड़ी गई थी? लोगों का कहना है कि "जब बाड़ी ही खेत खाने लगे, तो रखवाली कौन करेगा?"
वार्डवासियों का कहना है कि निर्माण के दौरान कई बार नाली की चौड़ाई और गुणवत्ता को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं, लेकिन जिम्मेदारों ने शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया। आज स्थिति यह है कि तेज बारिश होते ही पूरा पानी सड़क पर बहने लगता है और नगर की गंदगी सीधे वार्ड क्रमांक 7 के सोनी मोहल्ला पहुंच जाती है। लोगों का आरोप है कि "आंखों के सामने खेल होता रहा और जिम्मेदार तमाशबीन बने रहे।"
रहवासियों ने मांग की है कि जांच केवल नाली के निर्माण तक सीमित न रखी जाए, बल्कि स्वीकृत स्टीमेट, माप पुस्तिका (एमबी), गुणवत्ता परीक्षण, भुगतान प्रक्रिया और निर्माण कार्य की तकनीकी स्वीकृतियों की भी विस्तृत जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य पूरी गुणवत्ता और स्वीकृत मानकों के अनुरूप हुआ है तो आज यह समस्या क्यों उत्पन्न हुई?
वार्डवासियों ने अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) मानपुर से मांग की है कि नवनिर्मित नाली का तत्काल स्थलीय एवं तकनीकी निरीक्षण कराया जाए। यदि जांच में किसी भी स्तर पर अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों, उपयंत्री, संविदाकार एवं अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि सरकारी धन से कराए गए विकास कार्यों का लाभ जनता को मिलना चाहिए, न कि गंदगी, जलभराव और बदहाली।
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