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अस्पताल में पानी-पानी, प्रसूता बेहाल, टपकती छत के नीचे हुई डिलीवरी, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल


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drms news (मानपुर उमरिया)उमरिया के घुंघुटी उप स्वास्थ्य केंद्र में जर्जर भवन और टपकती छत के बीच प्रसूता द्रोपती यादव का प्रसव कराया गया। पानी से भरे कमरे में उन्होंने रात गुजारी। 20-25 गांवों के मरीज निर्भर होने के बावजूद डॉक्टर-एएनएम की अनुपस्थिति और बदहाल व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।

उमरिया जिले के घुंघुटी स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल तस्वीर ने ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस केंद्र में गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव और बेहतर चिकित्सा सुविधा मिलनी चाहिए, वहां जर्जर भवन, टपकती छत और पानी से भरे कमरे मरीजों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। हालात यह हैं कि प्रसव पीड़ा से कराहती महिला को रातभर पानी के बीच बैठकर गुजारना पड़ा और सुबह कमरे के एक कोने में उसका प्रसव कराया गया

तुम्मी निवासी द्रोपती यादव प्रसव पीड़ा के चलते रात करीब 11 बजे उप स्वास्थ्य केंद्र घुंघुटी पहुंचीं। अस्पताल पहुंचने के बाद उन्हें राहत मिलने के बजाय बदहाल व्यवस्था से जूझना पड़ा। बारिश के कारण स्वास्थ्य केंद्र के कमरों में चारों तरफ पानी भरा था और छत से लगातार पानी टपक रहा था। प्रसव के लिए पर्याप्त जगह तक उपलब्ध नहीं थी।

द्रोपती यादव ने बताया कि वह रात करीब 11 बजे स्वास्थ्य केंद्र पहुंची थीं। कमरे के अंदर पानी भरा हुआ था। छोटे बच्चे को साथ लेकर उन्होंने पूरी रात बैठकर गुजारी। उन्होंने कहा कि पूरी रात पानी के बीच काफी परेशानी उठानी पड़ी। सुबह बड़ी मुश्किल के बाद कमरे के एक कोने में जगह बनाकर उनका प्रसव कराया गया।

हर बारिश में खुल जाती है स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल

ग्रामीणों के अनुसार घुंघुटी उप स्वास्थ्य केंद्र का भवन लंबे समय से जर्जर हालत में है। बारिश होते ही छत से पानी टपकने लगता है और कई हिस्सों में पानी जमा हो जाता है। स्वास्थ्य केंद्र के आंगन से लेकर सड़क तक काई जमी हुई है। इससे मरीजों और उनके परिजनों के फिसलकर गिरने का खतरा बना रहता है।

बताया जाता है कि आसपास के करीब 20 से 25 गांवों के लोग स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए इसी उप स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर हैं। इसके बावजूद यहां डॉक्टर की नियमित मौजूदगी को लेकर ग्रामीण सवाल उठाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि समय पर स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध नहीं होने से प्रसव जैसी गंभीर परिस्थितियों में महिलाओं और उनके परिजनों को परेशानी उठानी पड़ती है।

जिम्मेदारों की चुप्पी भी सवालों के घेरे में

एक तरफ सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा और सुरक्षित प्रसव के दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ घुंघुटी का उप स्वास्थ्य केंद्र इन दावों की जमीनी हकीकत सामने ला रहा है। सवाल यह है कि जब स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों के बैठने और प्रसव के लिए सुरक्षित जगह तक उपलब्ध नहीं है, तो ग्रामीण महिलाएं किस भरोसे यहां पहुंचें ... ?

मामले को लेकर जब पाली बीएमओ पुट्टू लाल सागर से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। अधिकारी का पक्ष सामने नहीं आने से मामले में स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही को लेकर सवाल और गहरा गए हैं। (साभार मनोज श्रीवास्तव, केशव विश्वकर्मा मानपुर )

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