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बकेली में रच रहे व्यापक अनियमिता का इतिहास, 6 लाख की क्रांकीट सड़क में नाले की मिट्टी युक्त रेत, किनारे गड्ढा नुमा नाली खोदकर मोटाई का खेल

संपादक वीरेन्द्र प्रताप सिंह कृपया http://www.drmsnews.in वेबसाइट को शेयर, लाईक व लाइव जरूर करें और विज्ञापन व समाचारों के लिए संपर्क करें

drms news (मानपुर उमरिया) मध्यप्रदेश सरकार गांवों को चमकाने के लिए डीएमएफ यानी खनिज न्यास का पैसा पानी की तरह बहा रही है, लेकिन उमरिया जिले की पाली जनपद की बकेली ग्राम पंचायत में उसी पैसे से विकास नहीं, विनाश का इतिहास रचा जा रहा है। आंगनबाड़ी 03 से गोपाल बैगा के घर की ओर बन रही 6 लाख रुपये की क्रांकीट सड़क में रेत के नाम पर नाले की लाल-भूरी मिट्टी परोसी जा रही है, इंजीनियरिंग के सारे मानक पैरों तले रौंद दिए गए हैं और अब तो मोटाई में भी खेल किया जा रहा है।

ग्राम पंचायत बकेली में प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना से स्वीकृत क्रांकीट सड़क, स्वीकृति दिनांक 14/04/2026, लागत 6 लाख रुपये, आज भ्रष्टाचार की खुली प्रयोगशाला बन गई है।

नियम कहता है कि क्रांकीट डालने के पहले पूरी सड़क को समतलीय करना अनिवार्य है, ताकि हर जगह एक समान 125 से 170 मिमी मोटी क्रांकीट पड़े। लेकिन बकेली में समतलीय करने का काम किया ही नहीं गया। सड़क के दोनों किनारे नाली नुमा गहरा गड्ढा खोद दिया गया है, ताकि किनारे से देखने पर क्रांकीट 6-7 इंच मोटी दिखे। बीच में जमीन ऊंची-नीची वैसी ही छोड़ दी गई और नाम के लिए 2-3 इंच पतली परत डाल दी गई। यह मोटाई नहीं, आंखों में धूल झोंकने का तरीका है। दो पहिया वाहन क्या, बैलगाड़ी का भी लोड ऐसी सड़क नहीं झेल पाएगी।

मौके पर जो रेत डंप है, वह रेत नहीं, धोखा है। पास के नाले-खेत से उठाई गई मिट्टी मिली, डस्ट भरी, लाल-भूरी, अवैध रेत जमीन पर बिखरी पड़ी है। बगल में अधपकी, धूल उड़ाती गिट्टी का ढेर है। इसी मटेरियल से क्रांकीट का घोल बनाया जा रहा है। M20 ग्रेड का तो सवाल ही नहीं उठता।

तकनीकी मानकों की बात करें तो यह निर्माण जीरो बटा सन्नाटा है। क्रांकीट सड़क में अनिवार्य 125 माइक्रोन की पॉलिथीन बिछाना, वाइब्रेटर से कम्पेक्शन करना, हर 3-4 मीटर पर 12.70 मिमी का एक्सपेंशन ज्वाइंट काटना और 14 से 28 दिन तक तराई करना अनिवार्य है, लेकिन बकेली में एक भी मानक का पालन नहीं हुआ। न नीचे पॉलिथीन बिछी, न वाइब्रेटर चला, न ज्वाइंट कटा।

और खेल यहीं खत्म नहीं होता। क्रांकीट सड़क तो बना दी गई, लेकिन उसका जियो टैग, माप पुस्तिका, पूर्णता प्रमाण पत्र आज तक पंचायत दर्पण पर अपलोड ही नहीं किया गया। पूरे पाली जनपद की पंचायतों ने नया रिवाज बना लिया है - धुंधले, अवाच्य, अपठनीय बिल अपलोड करो, ताकि कोई असलियत न जान सके। निर्माण की फोटो भी ऐसी डाली जाती है कि कुछ समझ ही न आए।

यही वजह है कि 6 लाख की लागत मिट्टी में मिलने वाली है। ग्रामीणों ने कलेक्टर उमरिया और सीईओ जनपद पाली से मांग की है कि सड़क की समतलीयकरण जांच, रेत-गिट्टी का लैब टेस्ट, कोर कटिंग से मोटाई की जांच, पंचायत दर्पण पर साफ दस्तावेज अपलोड और दोषियों से राशि वसूली कर एफआईआर दर्ज की जाए। (सौजन्य से मनोज श्रीवास्तव, केशव विश्वकर्मा मानपुर)

संपादक वीरेन्द्र प्रताप सिंह कृपया http://www.drmsnews.in वेबसाइट को शेयर, लाईक व लाइव जरूर करें और विज्ञापन व समाचारों के लिए संपर्क करें। आपका सहयोग हमारे लिए अमूल्य है, बहुत बहुत धन्यवाद आभार। डिस्क्लेमर : यहां पर दिया गया प्रसारित व प्रकाशित विज्ञापन/समाचार, हमें विभिन्न सूत्रों से मिली जानकारी पर आधारित है, जिसे केवल सूचना के लिए दी जा रही है drms newsसंपादक इसकी पुष्टि नही करता और ना ही जिम्मेदार है। 8962637936

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