
बाघों के जंगल में पहरा देने वालों के घरों में पसरा संकट
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drms news (मानपुर/उमरिया)। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों और वन संपदा की सुरक्षा में दिन-रात जुटे श्रमिकों के सामने अब अपने परिवार का पेट पालने का संकट खड़ा हो गया है। बांधवगढ़ ट्रेड यूनियन उमरिया के अध्यक्ष संतराम सिंह ने दावा किया है कि पनपथा, पतौर, मानपुर, कल्लवाह, धमोखर, खितौली सहित विभिन्न रेंजों में कार्यरत श्रमिकों का कहीं दो तो कहीं तीन माह का वेतन लंबित है। समय पर भुगतान नहीं होने से श्रमिकों के परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं और दशहरा जैसे पर्व पर भी उनके घरों में खुशियां फीकी रहीं।
जंगल की सुरक्षा का जिम्मा, लेकिन परिवार की चिंता कौन करेगा ... ?
संतराम सिंह का आरोप है कि श्रमिकों से जंगल में बेहद जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में काम कराया जाता है। वन्यजीवों की निगरानी, वन संपदा की सुरक्षा और कथित तस्करी पर रोक लगाने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में उनकी ड्यूटी लगती है। इसके बावजूद समय पर वेतन भुगतान नहीं किया जा रहा।
यूनियन अध्यक्ष के मुताबिक कुशल श्रमिक को करीब 15 हजार रुपये और अकुशल श्रमिक को करीब 10,500 रुपये मासिक भुगतान मिलता है। उनका आरोप है कि कई श्रमिकों से रविवार सहित लगातार ड्यूटी ली जाती है, लेकिन इसके बावजूद वेतन के लिए उन्हें इंतजार करना पड़ रहा है।
तीन माह बाद एक माह का भुगतान देने का आरोप
संतराम सिंह ने विभागीय व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कई बार तीन माह का वेतन लंबित रहने के बाद केवल एक माह का भुगतान किया जाता है। उनका कहना है कि यदि कम वेतन पाने वाले श्रमिक को भी महीनों मेहनताना नहीं मिलेगा तो वह अपने परिवार का राशन, बच्चों की पढ़ाई और बीमारी का खर्च कैसे चलाएगा ... ?
ड्यूटी के दौरान हुई आंख खराब, फिर भी नहीं मिली मदद
यूनियन अध्यक्ष ने मानपुर रेंज के कठई सर्कल में कार्यरत रहे श्रमिक विवेक बैगा का मामला भी उठाया। उनके अनुसार ड्यूटी के दौरान विवेक बैगा की आंख खराब हो गई, लेकिन विभाग की ओर से अपेक्षित चिकित्सा सहायता नहीं मिली। संतराम सिंह का दावा है कि विवेक का करीब तीन माह का वेतन भी लंबित है।
घोर विडंबना श्रमिक की मौत के बाद भी परिजन भुगतान के इंतजार में
धमोखर रेंज के धौरखोह बेरियल में कार्यरत रहे श्रमिक बल्लू चौधरी की बीमारी के चलते कुछ दिन पहले मृत्यु हो गई। संतराम सिंह के अनुसार मृतक के परिजनों का आरोप है कि आर्थिक अभाव के कारण समय पर इलाज नहीं हो सका। यूनियन का दावा है कि बल्लू चौधरी की मृत्यु के बाद भी उनके करीब तीन माह के लंबित वेतन का भुगतान परिजनों को नहीं किया गया है।
सवाल बड़ा है जंगल सुरक्षित रखने वालों का भविष्य कौन सुरक्षित करेगा.. ?
बांधवगढ़ के जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा में श्रमिकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे में उनके वेतन का महीनों लंबित रहना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जब श्रमिक जोखिम लेकर जंगल की सुरक्षा कर रहे हैं, तो उनके परिवारों की आर्थिक सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है ...? यूनियन ने लंबित वेतन का तत्काल भुगतान, चिकित्सा सुविधा, सुरक्षा संसाधन और नियमानुसार अवकाश उपलब्ध कराने की मांग की है।
आपको बता दें की श्रमिकों द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक एवं उपसंचालक से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन दोनों के द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया प्रबंधन का पक्ष मिलने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाएगा।(सूचनादाता एवं संकलनकर्ता- समाजसेवी मनोज श्रीवास्तव, केशव विश्वकर्मा मानपुर)
संपादक वीरेन्द्र प्रताप सिंह कृपया http://www.drmsnews.in वेबसाइट को शेयर, लाईक व लाइव जरूर करें और विज्ञापन व समाचारों के लिए संपर्क करें। 8962637936, 8085090333 आपका सहयोग हमारे लिए अमूल्य है, बहुत बहुत धन्यवाद आभार। डिस्क्लेमर : यहां पर दिया गया प्रसारित व प्रकाशित विज्ञापन/समाचार, हमें विभिन्न सूत्रों से मिली जानकारी पर आधारित है, जिसे केवल सूचना के लिए दी जा रही है drms news व संपादक इसकी पुष्टि नही करता और ना ही जिम्मेदार है।
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