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शहडोल में किसानों को दूसरी मोहलत, उमरिया के जनप्रतिनिधि खामोश क्यों...? : श्री सिंह

10 अक्टूबर को खत्म हो चुकी थी धान पंजीयन की समय-सीमा, शहडोल में 8521 किसानों को मिला दोबारा मौका; तिलक राज सिंह ने भाजपा विधायकों को घेरा

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drms news (मानपुर/उमरिया)। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए पंजीयन की निर्धारित समय-सीमा 10 अक्टूबर को समाप्त हो चुकी है। गिरदावरी, एग्रीस्टैक में खसरा प्रदर्शित नहीं होने और तकनीकी समस्याओं के कारण पंजीयन से वंचित रह गए किसानों के लिए अब पड़ोसी जिले शहडोल में विशेष राहत दी गई है। वहां 8521 किसानों को 28 अक्टूबर 2026 तक पंजीयन कराने का अवसर मिला है। लेकिन उमरिया जिले के छूटे किसानों के लिए ऐसी पहल नहीं होने का मुद्दा अब राजनीतिक तूल पकड़ रहा है।

कांग्रेस पार्टी से मानपुर विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशी रहे तिलक राज सिंह ने उमरिया के भाजपा जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उन्हें घेरा है। उन्होंने सवाल किया कि जब पड़ोसी जिले शहडोल में किसानों की समस्या को शासन तक पहुंचाकर पंजीयन की अतिरिक्त व्यवस्था कराई जा सकती है, तो उमरिया के किसानों के लिए ऐसी पहल क्यों नहीं की जा रही ... ?

शहडोल में विधायक की पहल, 8521 किसानों को राहत

शहडोल जिले में ब्यौहारी विधायक शरद जुगलाल कोल ने 17 अक्टूबर 2026 को खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को पत्र लिखकर पंजीयन से छूटे 8521 किसानों की समस्या उठाई थी। पत्र में पटवारियों की हड़ताल के कारण गिरदावरी प्रभावित होने का हवाला देते हुए पंजीयन की समय-सीमा बढ़ाने की मांग की गई थी।

इसके बाद खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय भोपाल ने शहडोल जिले के शेष किसानों के पंजीयन की अनुमति देते हुए 28 अक्टूबर तक की समय-सीमा निर्धारित की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मामले में सीधी सांसद राजेश मिश्रा की पहल का भी उल्लेख किया जा रहा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

जारी निर्देशों के तहत एग्रीस्टैक आईडी अनिवार्य है और सिकमी-बटाईदार किसानों के लिए वैध सिकमीनामे की प्रति उपलब्ध कराने की शर्त रखी गई है। यह विशेष अनुमति शहडोल जिले के लिए है, उमरिया जिले के लिए स्वतः लागू नहीं होती।

2003 से मानपुर में भाजपा विधायक, फिर किसानों की आवाज कौन उठाएगा ... ?

तिलक राज सिंह ने कहा कि मानपुर विधानसभा सीट 2003 से बीजेपी जीत रही है और वर्ष 2008 से मीना सिंह विधायक हैं, जबकि बांधवगढ़ विधानसभा सीट वर्ष 2003 से लगातार भाजपा के पास रही है। बांधवगढ़ से पूर्व में ज्ञान सिंह विधायक और कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं तथा उनके पुत्र शिवनारायण सिंह वर्तमान में लगातार दूसरी बार विधायक हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि इतने लंबे राजनीतिक प्रतिनिधित्व और प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बावजूद यदि किसान पंजीयन जैसी बुनियादी प्रक्रिया में तकनीकी एवं प्रशासनिक समस्याओं से जूझ रहे हैं, तो उनके लिए प्रभावी पहल करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है ... ?

तिलक राज सिंह ने जनप्रतिनिधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि किसानों के हित में राजनीति केवल चुनावी वादों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जब किसान सरकारी व्यवस्था की खामियों के कारण अपनी फसल बेचने के लिए पंजीयन नहीं करा पाता, तब उसकी आवाज शासन तक पहुंचाना जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है।

शहडोल में रास्ता निकला, उमरिया के किसानों को इंतजार क्यों ... ?

तिलक राज सिंह ने कहा कि शहडोल में विधायक ने किसानों की समस्या को शासन के सामने रखा और छूटे किसानों के लिए अतिरिक्त अवसर उपलब्ध हुआ। उमरिया में भी गिरदावरी, एग्रीस्टैक और सर्वर संबंधी समस्याओं के कारण किसान पंजीयन से वंचित होने की शिकायतें सामने आई हैं। विभिन्न सेवा सहकारी समितियों की ओर से भी छूटे किसानों के पंजीयन की समय-सीमा बढ़ाने की मांग किए जाने की जानकारी है।

उन्होंने सवाल किया कि यदि किसानों की समस्या वास्तविक है, तो उमरिया के जनप्रतिनिधि शासन के सामने इसे मजबूती से क्यों नहीं उठा रहे? क्या किसानों को राहत दिलाने के लिए भी अब उन्हें अपने जनप्रतिनिधियों से बार-बार गुहार लगानी पड़ेगी ... ?

तिलक राज सिंह ने कहा कि किसान किसी राजनीतिक दल का प्रतिनिधि नहीं, बल्कि अन्नदाता है। उसकी फसल की बिक्री और मेहनत की कमाई का सवाल हो तो राजनीति से ऊपर उठकर पहल की जानी चाहिए।

किसानों को राहत दिलाना अब जनप्रतिनिधियों की अग्निपरीक्षा

धान पंजीयन की मूल समय-सीमा 10 अक्टूबर को समाप्त हो चुकी है। ऐसे में उमरिया के छूटे किसानों के लिए समय रहते शासन स्तर पर निर्णय कराने की जरूरत है। शहडोल में मिली विशेष अनुमति ने यह उम्मीद जरूर बढ़ाई है कि तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से वंचित किसानों के मामले में सरकार अलग से निर्णय ले सकती है।

अब सवाल उमरिया के जनप्रतिनिधियों से है कि वे किसानों की समस्या को शासन के समक्ष उठाकर अतिरिक्त पंजीयन की व्यवस्था कराने के लिए कब पहल करेंगे। किसानों को राहत मिलती है या वे पंजीयन से वंचित रह जाते हैं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। (सूचनादाता एवं संकलनकर्ता- समाजसेवी मनोज श्रीवास्तव, केशव विश्वकर्मा मानपुर)

संपादक वीरेन्द्र प्रताप सिंह कृपया http://www.drmsnews.in वेबसाइट को शेयर, लाईक व लाइव जरूर करें और विज्ञापन व समाचारों के लिए संपर्क करें। 8962637936, 8085090333 आपका सहयोग हमारे लिए अमूल्य है, बहुत बहुत धन्यवाद आभार। डिस्क्लेमर : यहां पर दिया गया प्रसारित व प्रकाशित विज्ञापन/समाचार, हमें विभिन्न सूत्रों से मिली जानकारी पर आधारित है, जिसे केवल सूचना के लिए दी जा रही है drms news व संपादक इसकी पुष्टि नही करता और ना ही जिम्मेदार है।

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