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Drms news (मानपुर/उमरिया)। वैसे तो हमारा जिला उमरिया बाघों के लिए दुनिया भर में बांधवगढ़ के नाम से प्रसिद्ध है टूरिस्ट आते हैं होटल में चलती हैं और टूरिस्ट कर से प्रशासन को फायदा होता है, पर आज तक हमारे वनांचल क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी किसने की सुध किसी ने नहीं लिया जबकि हमारा जिला उमरिया वह धरती है, जहां से ऐतिहासिक विधायक से लेकर कैबिनेट मंत्री एवं विधानसभा से लेकर संसद तक नेतृत्व करने वाले अधिनायक रह चुके हैं।
अब आवश्यकता है कुछ विकास कार्यों की तरफ नजर डालने की
जैसा कि हमारा जिला उमरिया बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान चारों ओर से घिरा हुआ है इसी जिले में नगर परिषद मानपुर जैसे शहर है और यहां से निकलने वाली सड़क व्यवहारी इलाहाबाद शहडोल जैसे जगह को जोड़ते हैं कोर जोन होने के कारण उमरिया से लेकर के मानपुर व्यवहारी एवं शहडोल मार्ग का विकास नहीं हो पा रहा ऐसे में उमरिया से मानपुर तक एवं ताला मोड़ से पनपत्था तक फ्लाई ओभर का निर्माण होना चाहिए जिससे समूचे क्षेत्र का विकास हो सके इसी तरह हमारे इंदवार क्षेत्र में मारकंडे पुल का निर्माण अति आवश्यक है जिससे इंदवार क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों का विकास सुनिश्चित है
ब्रिटिश सरकार द्वारा शुरू की गई प्रथम व्यावसायिक इकाई की स्थापना
उमरिया कोयला खदान की शुरुआत सन 1881 में की गई थी इस कोयला इकाई को खोलने और इसके संचालन में ब्रिटिश सरकार और रीवा रियासत के तत्कालीन महाराजा वेंकटरमन सिंह जू देव की मुख्य भूमिका थी
खदानों की शुरुआत
उमरिया में कोयला खदानों की खोज और शुरुआतो काम सन 1881 में भारत सरकार ब्रिटिश राज्य द्वारा किया गया था इसके बाद सन 1883 84 में शुरू किया गया था इसके बाद यहां आधिकारिक तौर पर उमरिया कालरी खोलकर उत्पादन शुरू किया गया
अंग्रेजों और राजा का समन्वय
शुरुआत में इस खदान का प्रबंध सेंटर प्रोविंस ब्रिटिश सरकार के पास था इसका मुख्य उद्देश्य कटनी रेलवे स्टेशन तक कोयले की आपूर्ति करना था आगे चलकर सन 1897 में अंग्रेजों द्वारा इस पूरी कोयला इकाई का प्रबंधन और नियंत्रण पूर्ण रूप से रीवा दरबार महाराज साहब को सौंप दिया गया इसके बाद रीवा रियासत ने इस कोयले खदान से मिलने वाले राजस्व को अपने राज्य के गरीब शोषित और जरूरतमंद जानता के लिए खर्च करना शुरू कर दिया
रीवा राजघराने ने की थी लाख प्रसंस्करण इकाई की स्थापना
रीवा रियासत के महाराजा गुलाब सिंह जू देव ने वर्ष 1903 में उमरिया में इस ऐतिहासिक लाख प्रसंस्करण की स्थापना की
बहुत जल्द रच गया गोदामो का जाल
लाख के सुरक्षित संग्रहण और व्यवस्थित व्यापार के लिए वर्ष 1941 तक इस कस्बे में 44 बड़े गोदाम तैयार किया जा चुके थे इन गोदाम की देखरेख मुकद्दम जैसे ग्राम अधिकारी करते थे
ऐतिहासिक महत्व
यह देश के सबसे पुराने सरकारी लाख कारखाने में से एक माना जाता है जिसने इस पूरे वनांचल क्षेत्र के आदिवासियों और किसानों को रोजगार का एक बड़ा जरिया दिया
अब जन अपेक्षा है लोक नायकों से
अब लोगों की अपेक्षा है सरकार से एवं अपने जननायकों से कि हमारे जिले का जो इंदवार बेल्ट है वह कोर जॉन एरिया से बाहर है वहां कोई औद्योगिक इकाइयां डाली जाए ताकि क्षेत्र में बढ़ रही बेरोजगारी गरीब किसान मजदूर वर्ग के लोग एवं शोषित वर्गों का उद्धार हो सके और जीवन जीने का जरिया मिल सके। (सूचनादाता एवं संकलनकर्ता- समाजसेवी मनोज श्रीवास्तव, केशव विश्वकर्मा मानपुर)
संपादक वीरेन्द्र प्रताप सिंह कृपया http://www.drmsnews.in वेबसाइट को शेयर, लाईक व लाइव जरूर करें और विज्ञापन व समाचारों के लिए संपर्क करें। 8962637936, 8085090333 आपका सहयोग हमारे लिए अमूल्य है, बहुत बहुत धन्यवाद आभार। डिस्क्लेमर : यहां पर दिया गया प्रसारित व प्रकाशित विज्ञापन/समाचार, हमें विभिन्न सूत्रों से मिली जानकारी पर आधारित है, जिसे केवल सूचना के लिए दी जा रही है drms news व संपादक इसकी पुष्टि नही करता और ना ही जिम्मेदार है। (भारत का तेजी से बढ़ता हुआ मासिक "ब्रजधर समाचार" अवश्य पढ़ें और अपने विचारों से हमें अवगत करायें)
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