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drms news (मानपुर-उमरिया)। मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में शिक्षा व्यवस्था को ठेंगा दिखाने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ प्रशासन ने अब पूरी तरह से कमर कस ली है। जिला शिक्षा केंद्र (DPC) ने सरकारी आदेशों को लगातार हवा में उड़ाने वाले 110 निजी स्कूलों के खिलाफ सख्त दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
लापरवाही और मनमानी का पूरा मामला
जैसा कि सामाजिक कार्यकर्ता मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि आदेशों को दिखाया ठेंगा: जिले भर में संचालित लगभग 190 निजी स्कूलों में से 110 स्कूलों ने प्रशासनिक गाइड लाइंस का पालन करने से साफ इनकार कर दिया है।
दो महीने से दबाए बैठे हैं जानकारी: शिक्षा विभाग ने दो माह पहले ही सभी स्कूलों से उनकी वार्षिक फीस संरचना, छात्रों को बांटी जाने वाली किताबों और शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत हुए दाखिलों का पूरा ब्योरा मांगा था।
रिमाइंडर्स का भी नहीं हुआ असर: जिला परियोजना समन्वयक द्वारा कई बार लिखित चेतावनी और स्मरण पत्र (रिमाइंडर) भेजने के बावजूद इन स्कूल संचालकों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।
इनका कहना है- “स्कूल संचालकों की यह मनमानी और तानाशाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इनके इस अड़ियल रवैये के कारण बच्चों के भविष्य से जुड़े शिक्षा के अधिकार (RTE) और फीस नियंत्रण की आवश्यक फाइलों का काम पूरी तरह ठप पड़ा है।”- के.के. डेहरिया, जिला परियोजना समन्वयक
अब आगे क्या ...? प्रशासन उठाने जा रहा है ये बड़े कदम
कलेक्टर की अदालत में पहुंचेगा मामला: इस पूरे गंभीर मामले को अब सीधे जिला कलेक्टर के संज्ञान में लाया जा रहा है ताकि उच्च स्तरीय कार्रवाई की जा सके।
समिति करेगी आर-पार की कार्रवाई: विभाग ने स्पष्ट किया है कि संबंधित विशेष समिति के माध्यम से इन डिफॉल्टर स्कूलों के खिलाफ सख्त कानूनी और दंडात्मक प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।
छात्रों के हक से समझौता नहीं: शिक्षा विभाग का साफ कहना है कि फीस की निगरानी, पुस्तक वितरण और RTE प्रवेश की कड़ाई से मॉनिटरिंग बेहद जरूरी है; जो स्कूल समय पर ब्योरा नहीं देंगे, उनकी मान्यता तक खतरे में पड़ सकती है।

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