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पुराना भवन, 5.56 लाख का नया खर्च ... ! ताले में कैद सार्वजनिक शौचालय ने मानपुर नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर खड़े किए गंभीर सवाल


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drms news (मानपुर-उमरिया)नगर परिषद मानपुर के चांदनी चौक स्थित सार्वजनिक शौचालय को लेकर स्थानीय स्तर पर विवाद और सवालों का दौर तेज हो गया है। जिस निर्माण कार्य को जनसुविधा के रूप में बड़े स्तर पर प्रस्तुत किया गया था, वह अभी तक आमजन के उपयोग के लिए पूरी तरह शुरू नहीं हो सका है। स्थानीय लोगों के अनुसार, शौचालय के मुख्य द्वार पर लगातार ताला लटका होने से बाजार क्षेत्र में आने वाले ग्रामीणों और व्यापारियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

पूर्व निर्मित ढांचे पर लाखों का खेल ... ?

जानकारी देते हुए समाजसेवी मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि पहले से निर्मित ई-पंचायत भवन में कराए गए कार्यों की लागत और बंद पड़ी सुविधा को लेकर स्थानीय नागरिकों ने मांगी तकनीकी व वित्तीय जांच मांग की है। स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जिस भवन में इस सार्वजनिक शौचालय को विकसित किया गया है, वह कोई नई इमारत नहीं है। यह वर्ष 2016 में तत्कालीन ग्राम पंचायत मानपुर द्वारा निर्मित 'ई-पंचायत भवन' है। इसी पूर्व निर्मित संरचना के भीतर शौचालय सीट, सेप्टिक टैंक, टाइल्स, विद्युत व्यवस्था, रंग-रोगन एवं अन्य छोटे-मोटे कार्यों पर लगभग 5 लाख 56 हजार रुपये की भारी-भरकम लागत स्वीकृत होने की जानकारी सामने आई है।

इसी बिंदु को लेकर नागरिकों के बीच तीखी चर्चा है कि जब मूल ढांचा पहले से मौजूद था, तो इतनी बड़ी स्वीकृत राशि किन-किन कार्यों पर व्यय की गई और इसका तकनीकी आधार क्या रहा। ...? लोगों का साफ कहना है कि यदि खर्च वास्तविक कार्यों के अनुरूप हुआ है, तो विभाग को इसकी माप पुस्तिका और प्राक्कलन सार्वजनिक करने चाहिए, ताकि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके।

"₹ 2.5 लाख में पक्का मकान, तो शौचालय पर ₹ 5.56 लाख क्यों   ... ?"

स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों का तर्क है कि भारत सरकार के मानकों के अनुसार जब लगभग ढाई लाख रुपये में दो कमरों का पक्का मकान निर्माण संभव है, ऐसे में पहले से बने-बनाए भवन के भीतर एक सार्वजनिक शौचालय के जीर्णोद्धार या निर्माण पर 5 लाख 56 हजार रुपये की लागत आना कई स्तरों पर संदेह पैदा करता है और यह गंभीर जांच का विषय है।

विज्ञापन और हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर

स्थानीय नागरिकों ने रोष जताते हुए कहा कि कुछ दिन पूर्व कई समाचार पत्रों एवं सोशल मीडिया/व्हाट्सएप ग्रुपों पर कुछ प्रचार माध्यमों से इस सार्वजनिक शौचालय को नगरवासियों के लिए “नई सौगात” बताते हुए इसके शुभारंभ और बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रसारित किया गया था। लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रही है। जनता की सुविधा के नाम पर सरकारी खजाने से तैयार किया गया यह शौचालय आज भी ताले में बंद है, जिससे प्रशासन के प्रचार और वास्तविक स्थिति के बीच का अंतर उजागर हो गया है।

 संवेदनशील कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग

क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम जनता ने पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराए जाने की पुरजोर मांग की है। उनका कहना है कि उच्च स्तरीय जांच से न केवल खर्च का पाई-पाई का विवरण सामने आएगा, बल्कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता भी सुनिश्चित हो सकेगी।

नगरवासियों को जिले की संवेदनशील कलेक्टर से पूरी जनअपेक्षा है कि वे इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष जांच के आदेश देंगी, ताकि यदि सभी कार्य नियमानुसार हुए हैं तो स्थिति स्पष्ट हो सके और यदि किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार सामने आता है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

संपादक वीरेन्द्र प्रताप सिंह कृपया http://www.drmsnews.online वेबसाइट को शेयर, लाईक व लाइव जरूर करें और विज्ञापन व समाचारों के लिए संपर्क करें। आपका सहयोग हमारे लिए अमूल्य है, बहुत बहुत धन्यवाद आभार। डिस्क्लेमर : यहां पर दिया गया प्रसारित व प्रकाशित विज्ञापन/समाचार, हमें विभिन्न सूत्रों से मिली जानकारी पर आधारित है, जिसे केवल सूचना के लिए दी जा रही है drms newsसंपादक इसकी पुष्टि नही करता और ना ही जिम्मेदार है। 8962637936

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