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drms news (मानपुर-उमरिया)। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से लगे ग्राम कुदरी में टाइगर हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आज दोपहर 30 वर्षीय कल्याण सिंह पिता कृपाल सिंह की टाइगर के हमले में मौत हो गई। घटना गांव से लगे झिरिया नाला क्षेत्र में हुई, जहां समाचार लिखे जाने तक टाइगर शव के पास ही बैठा हुआ था। वन विभाग का अमला हाथियों की मदद से टाइगर को हटाने के प्रयास में जुटा है, ताकि शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया जा सके।

समाज सेवी मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि एक दिन पहले टाइगर के हमले में जान गंवाने वाली फूलबाई गौड़ का अंतिम संस्कार और चिता की आग ठंडी भी नहीं हुई थी कि कुछ ही घंटों बाद उसी परिवार के कल्याण सिंह को भी टाइगर ने अपना शिकार बना लिया। लगातार दो दिनों में एक ही परिवार पर हुए दो टाइगर हमलों ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है।
झिरिया नाला के आसपास दहशत, खेत जाने से डर रहे ग्रामीण
स्थानीय लोगों के अनुसार गांव से लगे झिरिया नाला और पट्टा आराजी भूमि के आसपास टाइगर की लगातार गतिविधियां देखी जा रही हैं। किसान और ग्रामीण रोजमर्रा के काम के लिए इन्हीं रास्तों से खेतों तक पहुंचते हैं, लेकिन अब लोगों में भय का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि रोजी-रोटी के लिए खेतों में जाएं या अपनी जान बचाने के लिए घरों में रहें, यही सबसे बड़ा सवाल बन गया है।
ग्रामीणों का दावा है कि पिछले दो दिनों में यह दूसरा और बीते एक महीने में ग्राम कुदरी क्षेत्र में टाइगर हमले की पांचवीं घटना है। इसके बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकलने से लोगों में गहरा आक्रोश है।
"क्या अब गांव छोड़ दें .. ?"—ग्रामीणों का सवाल
लगातार हो रहे टाइगर हमलों के बाद ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि जब एक ही परिवार पर 24 घंटे के भीतर दूसरी बार मौत का कहर टूट सकता है, तो गांव के अन्य लोग खुद को कितना सुरक्षित मानें? ग्रामीणों ने प्रभावित क्षेत्र में विशेष निगरानी, लगातार गश्त और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर त्वरित एवं प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
दो दिन में दो मौतें, एक महीने में पांचवीं घटना—अब जवाब कौन देगा। ....?
कुदरी में लगातार हो रहे टाइगर हमलों के बाद लोगों के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि आखिर कब तक ग्रामीण भय के साये में जीने को मजबूर रहेंगे? एक ही परिवार पर 24 घंटे में दूसरी मौत ने जनआक्रोश को और बढ़ा दिया है। अब सबकी निगाहें वन विभाग और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
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