
drms news (मानपुर उमरिया)। घुनघुटी जंगल में चल रहे कोयला सर्वे के सामने टाइगर कॉरिडोर और पेसा जैसे संवेदनशील कानून सिर्फ कागजी दिखावा बनकर रह गए हैं। कोलकाता की यूनाइटेड कोल सर्वे कंपनी ने घुनघुटी के जंगलों में जड़ जमा ली है और बिना ग्राम पंचायत को सूचना दिए ही बोरिंग का काम धड़ल्ले से कर रही है।
समाचार सुर्खियों में आने और दोहरे कानून के उल्लंघन की खबर प्रकाशित होने के बाद भी अवैध ड्रिलिंग पर रोक नहीं लगी है। कंपनी अब भी रात के अंधेरे में 100 डेसिबल से अधिक आवाज वाली ड्रिल मशीन चला रही है, जिससे बाघ, तेंदुआ और भालू का सदियों पुराना प्राकृतिक कॉरिडोर टूट रहा है।
टाइगर कॉरिडोर खतरे में: वन विभाग का स्पष्ट आदेश है कि टाइगर कॉरिडोर में शाम 5 बजे के बाद किसी भी बड़ी मशीन का संचालन प्रतिबंधित है, क्योंकि रात में हिंसक वन्य जीवों की आवाजाही सबसे अधिक होती है। तेज आवाज और रोशनी से विचलित होकर बाघ अपना रास्ता बदलकर आबादी वाले क्षेत्रों में आ जाते हैं, जिससे मानव-वन्य जीव द्वंद्व का सीधा खतरा पैदा हो रहा है।
पेसा कानून की उड़ी धज्जियां: वहीं दूसरी ओर बिना ग्राम सभा की अनुमति के धड़ल्ले से बोरिंग कर आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों को कुचला जा रहा है। संविधान की पांचवी अनुसूची और पेसा एक्ट के तहत अनुसूचित क्षेत्र में किसी भी तरह के खनन, सर्वे या उत्खनन से पहले ग्राम सभा की लिखित सहमति अनिवार्य है, लेकिन घुनघुटी में पूरे गांव को अंधेरे में रखकर काम किया जा रहा है।
अफसरों के विरोधाभासी बयान ने खोली पोल, पटवारी ने भी झाड़ा पल्ला
वन परिक्षेत्राधिकारी घुनघुटी धर्मू सिंह इसे वन भूमि बताकर भोपाल से वैधानिक अनुमति होने की बात कह रहे हैं, तो अनुविभागीय अधिकारी वन दिगेंद्र सिंह इसे राजस्व भूमि बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं। जबकि मौके पर कंपनी के मैनेजर के पास एक भी कागज नहीं मिला। न वन विभाग भोपाल की कथित अनुमति, न राजस्व की अनुमति और न ही पेसा के तहत ग्राम सभा की अनुमति।
जब इस मामले में घुनघुटी हल्का पटवारी धेनू प्रसाद प्रजापति से दूरभाष पर जानकारी ली गई तो उन्होंने स्पष्ट कहा - "इस विषय में किसी भी राजस्व अधिकारियों के द्वारा हमसे प्रतिवेदन नहीं लिया गया।" पटवारी के इस बयान के बाद यह तय हो गया कि कंपनी के पास न वन की अनुमति है और न राजस्व की।
जब एक ही जमीन पर दो अधिकारी दो तरह के बयान दे रहे हैं, हल्का पटवारी प्रतिवेदन से ही इंकार कर रहा है और मौके पर एक भी दस्तावेज नहीं है, तो यह साफ है कि पूरा सर्वे अवैध रूप से किसके इशारे पर चल रहा है।
ग्रामीणों की मांग: आक्रोशित ग्रामीणों ने कलेक्टर उमरिया और वन मंडलाधिकारी उमरिया को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि -1. भोपाल से मिली कथित अनुमति को सार्वजनिक किया जाए, 2. यदि यह राजस्व भूमि है तो राजस्व की अनुमति दिखाई जाए, 3. पेसा एक्ट के तहत ग्राम सभा की लिखित सहमति का दस्तावेज दिया जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक तीनों अनुमतियां मौके पर नहीं दिखाई जातीं, तब तक जंगल में चल रही अवैध ड्रिलिंग पर तत्काल रोक लगाई जाए और रात में नियम विरुद्ध मशीन चलाने वाली यूनाइटेड कोल सर्वे कंपनी तथा मिलीभगत करने वाले अधिकारियों पर FIR दर्ज कर कार्रवाई की जाए।(सूचनादाता एवं संकलनकर्ता- समाजसेवी मनोज श्रीवास्तव, केशव विश्वकर्मा मानपुर)
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